नई दिल्ली. बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में बढ़ती चिंताओं के बीच, मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले WhatsApp ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। व्हाट्सएप अब ‘पैरेंट-मैनेज्ड अकाउंट्स’ (Parent-Managed Accounts) फीचर को रोलआउट कर रहा है। यह फीचर विशेष रूप से 13 साल से कम उम्र के बच्चों (Pre-teens) के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि वे एक सुरक्षित वातावरण में मैसेजिंग की दुनिया से जुड़ सकें।
भारत सरकार के नए डिजिटल नियमों और वैश्विक सुरक्षा मानकों को देखते हुए, व्हाट्सएप का यह अपडेट माता-पिता के लिए किसी बड़े वरदान से कम नहीं है।
कैसे काम करेगा ‘सेकेंडरी अकाउंट’ सिस्टम?
इस नए सिस्टम के तहत, माता-पिता अपने बच्चे के लिए एक लिंक्ड सेकेंडरी अकाउंट बना पाएंगे। इसकी सेटअप प्रक्रिया बेहद सुरक्षित है:
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QR कोड लिंकिंग: बच्चे का फोन और माता-पिता का फोन साथ रखकर QR कोड स्कैन करना होगा।
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6-अंकों का प्राइमरी पिन: अभिभावकों को एक मास्टर पिन (Parental PIN) सेट करना होगा। इस पिन के बिना बच्चा अकाउंट की किसी भी महत्वपूर्ण सेटिंग को बदल नहीं पाएगा।
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उम्र का सत्यापन: अकाउंट सेटअप के दौरान बच्चे की उम्र की जानकारी देना अनिवार्य होगा।
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बच्चों के व्हाट्सएप पर होंगी ये 5 सख्त पाबंदियां
नए अपडेट के अनुसार, बच्चों के अकाउंट में कुछ खास फीचर्स को पूरी तरह प्रतिबंधित या नियंत्रित रखा गया है:
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लिमिटेड कॉन्टैक्ट्स: बच्चा केवल उन्हीं लोगों से बात कर पाएगा जो उसकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव होंगे। अनजान नंबरों से आने वाले मैसेज सीधे माता-पिता के पास रिव्यू के लिए जाएंगे।
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नो ‘अपडेट्स’ टैब: बच्चों को व्हाट्सएप चैनल्स या ब्रॉडकास्ट कंटेंट नहीं दिखेगा, ताकि वे गलत जानकारी या आपत्तिजनक सामग्री से दूर रहें।
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ग्रुप कंट्रोल: बच्चा अपनी मर्जी से किसी नए ग्रुप में शामिल नहीं हो सकेगा। किसी भी ग्रुप इनविटेशन को स्वीकार करने के लिए माता-पिता की अनुमति (पिन के जरिए) अनिवार्य होगी।
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चैट लॉक की मनाही: बच्चे किसी भी चैट को लॉक या छिपा नहीं सकेंगे। माता-पिता कभी भी डिवाइस लेवल पर चेक कर सकेंगे कि बच्चा किससे क्या बात कर रहा है।
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नो मेटा AI: बच्चों के अकाउंट में AI फीचर्स और लोकेशन शेयरिंग जैसे टूल्स को फिलहाल बंद रखा जाएगा।
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प्राइवेसी का भी रखा गया है ख्याल
भले ही माता-पिता अकाउंट पर नजर रख सकेंगे, लेकिन व्हाट्सएप ने साफ किया है कि End-to-End Encryption बरकरार रहेगा। इसका मतलब है कि माता-पिता केवल यह देख पाएंगे कि बच्चा किससे बात कर रहा है और उसकी एक्टिविटी क्या है, लेकिन वे सीधे तौर पर निजी संदेशों को अपने फोन से नहीं पढ़ पाएंगे जब तक वे बच्चे का फिजिकल डिवाइस चेक न करें।
भविष्य की तैयारी: 13 साल के बाद क्या होगा?
जब बच्चा व्हाट्सएप की आधिकारिक न्यूनतम आयु (भारत में 13 वर्ष) तक पहुंच जाएगा, तो उसे अपने अकाउंट को स्टैंडर्ड अकाउंट में बदलने का विकल्प मिलेगा। हालांकि, माता-पिता चाहें तो इस सुरक्षा घेरे को अगले 12 महीनों तक और बढ़ा सकेंगे।
एक्सपर्ट टिप: यदि आप एक अभिभावक हैं, तो व्हाट्सएप को लेटेस्ट वर्जन पर अपडेट रखें। यह फीचर धीरे-धीरे सभी क्षेत्रों में रोलआउट किया जा रहा है।
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