मुंबई. मध्य पूर्व (West Asia) में जारी भीषण युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के बीच भारत के लिए राहत की एक बड़ी खबर आई है। सऊदी अरब से 1.35 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आ रहा विशाल टैंकर ‘शेनलॉन्ग’ (Shenlong) सुरक्षित रूप से मुंबई बंदरगाह पहुँच गया है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद, यह भारत पहुँचने वाला पहला बड़ा क्रूड ऑयल टैंकर है।
इस जहाज की सफल यात्रा केवल एक व्यापारिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि युद्ध क्षेत्र के बीच से भारतीय नाविकों की बहादुरी और कूटनीतिक जीत की मिसाल भी है।
कैसे मौत के रास्ते को ‘Dark Mode’ में किया पार?
लाइबेरिया के ध्वज वाला यह Suezmax टैंकर सऊदी अरब के रस तनुरा (Ras Tanura) बंदरगाह से 1 मार्च को रवाना हुआ था। 8 मार्च को जब यह दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में पहुँचा, तो हमले के डर से जहाज के कैप्टन ने एक साहसी फैसला लिया।
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AIS ट्रैकिंग बंद की: दुश्मनों की रडार और मिसाइल ट्रैकिंग से बचने के लिए जहाज ने अपना Automatic Identification System (AIS) बंद कर दिया, जिसे समुद्री भाषा में ‘गोइंग डार्क’ (Going Dark) कहा जाता है।
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5 दिन का सस्पेंस: करीब 24 घंटे तक यह जहाज अंतरराष्ट्रीय ट्रैकिंग सिस्टम से गायब रहा। 9 मार्च को खतरा पार करने के बाद यह दोबारा सिस्टम पर दिखाई दिया।
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मिसाइलों का साया: इसी दौरान पास ही में ‘एक्सप्रेस रोम’ और ‘मयूरी नारी’ जैसे जहाजों पर हमले की खबरें आई थीं, लेकिन शेनलॉन्ग सुरक्षित निकलने में कामयाब रहा।
भारतीय कैप्टन और 29 जांबाज क्रू मेंबर्स
जहाज का नेतृत्व भारतीय कैप्टन सुक्षांत सिंह संधू (Sukshant Singh Sandhu) कर रहे थे। उनके साथ चालक दल में कुल 29 सदस्य थे, जिनमें भारतीय, पाकिस्तानी और फिलिपिनो नागरिक शामिल हैं। कैप्टन संधू की सूझबूझ से यह खेप बुधवार दोपहर 1 बजे मुंबई पहुँची और शाम 6 बजे जवाहर द्वीप (Jawahar Dweep) पर इसे बर्थ किया गया।
आम आदमी को क्या होगा फायदा?
पिछले कुछ दिनों में युद्ध के कारण भारत में रसोई गैस (LPG) की कीमतों में 60 रुपये तक की बढ़ोतरी और पेट्रोल-डीजल की किल्लत की आशंका जताई जा रही थी। इस टैंकर के पहुँचने से निम्नलिखित लाभ होंगे:
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LPG और ईंधन की आपूर्ति: इस कच्चे तेल को मुंबई के माहुल (Mahul) स्थित रिफाइनरियों में भेजा जाएगा। इससे रसोई गैस और डीजल की कमी दूर होगी।
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कीमतों पर स्थिरता: कच्चे तेल की निरंतर आपूर्ति से बाजार में कीमतों में अचानक आने वाले उछाल पर लगाम लगेगी।
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रिफाइनरी ऑपरेशन: माहुल रिफाइनरी को अब कच्चा माल मिल सकेगा, जिससे सप्लाई चेन सुचारू रहेगी।
रणनीतिक जीत: ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी अधिकारियों के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत के बाद भारत जाने वाले जहाजों को ‘सुरक्षित मार्ग’ (Safe Passage) देने पर सहमति बनी थी। हालांकि, क्षेत्र में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है, क्योंकि अभी भी 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज उस संवेदनशील क्षेत्र के आसपास फंसे हुए हैं।
बड़ी बात: भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए केवल खाड़ी देशों पर निर्भरता कम की है और पिछले 11 दिनों में रूस से होने वाले तेल आयात में 50% की बढ़ोतरी की है, ताकि होर्मुज संकट का असर कम हो सके।
Matribhumisamachar


