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US-Iran War Update: वार्ता विफल, परमाणु हथियारों पर अड़ा ईरान; हॉर्मुज़ में बढ़ी जंग की आहट

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इस्लामाबाद | रविवार, 12 अप्रैल 2026

अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चली 21 घंटे की मैराथन वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस (J.D. Vance) पाकिस्तान से अमेरिका के लिए रवाना हो गए हैं। इस असफल वार्ता के बाद मध्य-पूर्व (Middle East) में तनाव चरम पर है और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर संकट के बादल और गहरे हो गए हैं।

क्यों टूटी बातचीत? अमेरिका की ‘अंतिम और सर्वश्रेष्ठ’ शर्तें

सूत्रों के अनुसार, उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को “अंतिम प्रस्ताव” (Final and Best Offer) दिया था, जिसे ईरान ने “अस्वीकार्य” बताकर ठुकरा दिया।

प्रमुख विवादित बिंदु:

  • परमाणु कार्यक्रम पर पूर्ण रोक: अमेरिका ने मांग की कि ईरान न केवल यूरेनियम संवर्धन शून्य करे, बल्कि अपने मौजूदा 900 पाउंड यूरेनियम भंडार को भी तुरंत देश से बाहर भेजे।

  • हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का नियंत्रण: ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग की सुरक्षा का जिम्मा खुद संभालेगा और ईरान को जहाजों से “टोल टैक्स” वसूलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

  • मिसाइल कार्यक्रम: अमेरिका ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट करने की शर्त रखी थी।

“हमें ईरान से एक पुख्ता प्रतिबद्धता चाहिए थी कि वे कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे। चूंकि उन्होंने इसे ठुकरा दिया, इसलिए समझौता संभव नहीं है।”जे.डी. वेंस, अमेरिकी उपराष्ट्रपति

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य: दुनिया का सबसे बड़ा ‘चोकपॉइंट’ अब रणक्षेत्र

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) इस समय दुनिया का सबसे संवेदनशील इलाका बन गया है। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए युद्ध के बाद से ईरान ने इस मार्ग को लगभग बंद कर रखा है।

  • वैश्विक प्रभाव: दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग 20% इसी संकरे रास्ते से गुजरता है।

  • ताजा स्थिति: ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना (CENTCOM) ने हॉर्मुज़ में बिछी ईरानी समुद्री सुरंगों (Sea Mines) को साफ करना शुरू कर दिया है।

  • NATO की भूमिका: ट्रंप ने नाराजगी जताई है कि इस सुरक्षा अभियान में NATO देशों से अपेक्षित मदद नहीं मिल रही है, जबकि अन्य देश भी इस मार्ग का उपयोग करते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप का सख्त रुख: “जीत हमारी ही होगी”

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत की विफलता पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका अब समझौते का इंतजार नहीं करेगा। ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि ईरान ने तुरंत हॉर्मुज़ मार्ग नहीं खोला, तो अमेरिका सैन्य बल का प्रयोग जारी रखेगा। उन्होंने Truth Social पर पोस्ट किया:

“ईरान के पास केवल समुद्री बारूदी सुरंगों का डर दिखाने का विकल्प बचा है, लेकिन हम उनके माइन-ड्रॉपर जहाजों को पहले ही समुद्र की तलहटी में पहुंचा चुके हैं।”

ईरान की प्रतिक्रिया: “हम जल्दबाजी में नहीं हैं”

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कलीबाफ ने अमेरिकी शर्तों को “अत्यधिक” (Excessive) करार दिया। ईरान का कहना है कि:

  1. वह किसी भी “तर्कहीन” समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा।

  2. जब तक अमेरिका उसकी संप्रभुता का सम्मान नहीं करता, तब तक कोई प्रगति संभव नहीं है।

  3. हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान का अधिकार बरकरार रहेगा।

क्या होगा आगे?

वार्ता विफल होने के बाद अब 8 अप्रैल से शुरू हुआ दो हफ्ते का अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) खतरे में है। इजरायल द्वारा लेबनान में हिजबुल्लाह पर जारी हमलों ने आग में घी डालने का काम किया है। यदि अगले कुछ दिनों में कूटनीतिक रास्ते नहीं खुले, तो दुनिया एक बड़े ऊर्जा संकट (Energy Crisis) और पूर्ण विकसित युद्ध की ओर बढ़ सकती है।

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