ढाका | रविवार, 12 अप्रैल 2026
बांग्लादेश के रंगपुर और कुश्तिया जिलों में शनिवार को भीड़ हिंसा (Mob Violence) की भीषण घटनाओं ने देश में सांप्रदायिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। इन घटनाओं में एक आध्यात्मिक नेता (मौलवी) की नृशंस हत्या कर दी गई, जबकि निजी विवादों को सांप्रदायिक रंग देकर हिंदू समुदाय के घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया। प्रशासन ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए प्रभावित इलाकों में भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) को तैनात किया है।
कुश्तिया: पुरानी वीडियो ने भड़काई आग, मौलवी की हत्या
कुश्तिया जिले में सबसे भयावह घटना घटी, जहां एक कथित आध्यात्मिक नेता शमीम रजा जहांगीर (60) को उग्र भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला।
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कारण: शुक्रवार को सोशल मीडिया पर उनका एक पुराना वीडियो (कथित तौर पर 2021 का) फिर से प्रसारित हुआ, जिसमें उन्होंने कुरान के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की थी।
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हमला: शनिवार को 200 से अधिक लोगों की भीड़ ने उनके आवास और ‘दरबार’ (धार्मिक स्थल) पर हमला कर दिया। भीड़ ने उन्हें लाठियों से पीटा और उनके दरबार में आग लगा दी।
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प्रभाव: इस हमले में मौलवी के 7 अनुयायी भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना के बाद क्षेत्र के कुछ हिंदू परिवारों पर भी हमले की खबरें हैं।
रंगपुर: ‘तीसरे पक्ष’ की साजिश से भड़की हिंसा
रंगपुर के दासपाड़ा बाजार में एक मुस्लिम युवक रकीब हसन की हत्या के बाद उपद्रवियों ने इसे सांप्रदायिक मोड़ दे दिया।
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सच्चाई: पुलिस की शुरुआती जांच और मृतक की मां के बयान के अनुसार, रकीब की हत्या हिंदू समुदाय ने नहीं, बल्कि मोहम्मद मोमिन नामक एक ड्रग तस्कर ने आपसी विवाद में की थी।
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नतीजा: अफवाह फैलने के बाद भीड़ ने हिंदू समुदाय के घरों और दुकानों में भारी तोड़फोड़ की। पुलिस का मानना है कि यह जांच को भटकाने और दंगे भड़काने के लिए ‘तीसरे पक्ष’ की सोची-समझी साजिश थी।
2026 में सांप्रदायिक हिंसा का डरावना ग्राफ
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (BHBCOP) की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के शुरुआती तीन महीनों (जनवरी-मार्च) में ही देश में 133 सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं दर्ज की गई हैं। यह आंकड़ा 2025 की तुलना में काफी अधिक है, जहां पूरे वर्ष में ऐसी 522 घटनाएं दर्ज हुई थीं।
| वर्ष/अवधि | सांप्रदायिक घटनाओं की संख्या | स्थिति |
| 2025 (पूरा वर्ष) | 522 | गंभीर |
| 2026 (जनवरी-मार्च) | 133 | अत्यंत चिंताजनक |
प्रशासन की कार्रवाई और चिंता
ढाका में प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि फरवरी 2026 में नई सरकार के गठन के बाद भीड़ हिंसा की यह पहली बड़ी घटना है।
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सुरक्षा घेरा: प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस और सेना की गश्त बढ़ा दी गई है।
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कानूनी कार्रवाई: कुश्तिया और रंगपुर पुलिस ने कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है।
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अफवाहों पर लगाम: सरकार ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ और पुरानी वीडियो साझा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
विशेषज्ञों का मत: मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि बांग्लादेश में “भीड़ न्याय” (Mob Justice) की संस्कृति बढ़ती जा रही है। व्यक्तिगत रंजिशों को धार्मिक रंग देकर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना एक खतरनाक पैटर्न बन गया है, जिससे देश की कानून-व्यवस्था और वैश्विक छवि को भारी नुकसान हो रहा है।
Matribhumisamachar


