इस्लामाबाद। शुक्रवार, 12 जून 2026
भारत और पाकिस्तान के बीच भू-राजनीतिक (Geopolitical) समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तानी मीडिया और वहां के रणनीतिक विशेषज्ञों के सुरों में एक बड़ा बदलाव देखा गया है। पाकिस्तान के बेहद जाने-माने और वरिष्ठ पत्रकार नजम सेठी (Najam Sethi) ने अपने हालिया टॉक शो में पाकिस्तानी सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को एक ऐसी सलाह दी है, जो इस बात का साफ संकेत है कि पाकिस्तान अब भारत की नई रक्षा और विदेश नीति के सामने खुद को बैकफुट पर महसूस कर रहा है।
नजम सेठी ने साफ शब्दों में कहा है कि भारत के साथ किसी भी तरह का सीधा सैन्य टकराव आत्मघाती और “बचकाना” साबित हो सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि पाकिस्तानी थिंक-टैंक की इस घबराहट के पीछे की असल वजह क्या है और इसमें कौन से तथ्य सही या सुधारे जाने योग्य हैं।
नजम सेठी की रणनीतिक सलाह: सीधा युद्ध नहीं, ‘डोजियर कूटनीति’ अपनाएं
नजम सेठी ने पाकिस्तानी हुक्मरानों को आगाह करते हुए कहा, “यह नहीं हो सकता कि सीमा पर कोई घटना या हमला हो और आप तुरंत अपने लड़ाकू विमान भारत पर हमला करने के लिए भेज दें। यह बेहद बचकानी हरकत होगी।”
सेठी का मानना है कि पारंपरिक युद्ध में भारत का मुकाबला करने के बजाय पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक कार्ड खेलना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान सरकार को सलाह दी कि:
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अफगानिस्तान का मुद्दा उठाएं: पाकिस्तान लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि भारत, अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के भीतर (विशेषकर बलूचिस्तान और केपीके प्रांत में) अस्थिरता फैला रहा है।
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अंतरराष्ट्रीय राजधानियों में गूंजे बात: सेठी के अनुसार, पाकिस्तान को मजबूत ‘डोजियर’ (सबूतों के दस्तावेज) तैयार करने चाहिए और उन्हें वाशिंगटन, लंदन, बीजिंग और संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक केंद्रों में सौंपना चाहिए ताकि भारत पर कूटनीतिक दबाव बनाया जा सके।
परमाणु नीति: ताकत या हार का डर?
इस पूरे विमर्श में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु पाकिस्तान की परमाणु नीति (Nuclear Policy) को लेकर है। नजम सेठी ने याद दिलाया कि पाकिस्तान ने आज तक ‘No First Use’ (पहले परमाणु हथियार इस्तेमाल न करने) की नीति पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जबकि भारत और चीन जैसे देशों की यह घोषित नीति है कि वे किसी भी देश पर पहला परमाणु हमला नहीं करेंगे।
विशेषज्ञों का विश्लेषण: पाकिस्तान द्वारा ‘No First Use’ नीति को न अपनाना उसकी ताकत नहीं, बल्कि उसका सबसे बड़ा डर है। पाकिस्तान को अच्छी तरह मालूम है कि उसकी चरमराते आर्थिक हालात और सीमित पारंपरिक सैन्य क्षमताएं भारत की विशाल और आधुनिक सेना के सामने ज्यादा देर नहीं टिक पाएंगी। ऐसे में, वह पारंपरिक युद्ध में अपनी संभावित हार को टालने के लिए ‘परमाणु हमले की धमकी’ को एक ढाल (Nuclear Deterrence) के रूप में इस्तेमाल करता है ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय तुरंत बीच-बचाव करने आ जाए।
निष्कर्ष
नजम सेठी जैसे वरिष्ठ विश्लेषक का यह बयान सीधे तौर पर यह स्वीकारोक्ति है कि भारत की ‘प्रो-एक्टिव’ और आक्रामक रक्षा नीति ने पाकिस्तान के मन में एक कड़ा संदेश दे दिया है। अब पाकिस्तान यह समझ चुका है कि भारत को घायल करने की कोई भी पुरानी चाल उल्टी पड़ सकती है। यही वजह है कि वे अब सीधे युद्ध के मैदान से भागकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक विक्टिम कार्ड (Victim Card) खेलने और दुनिया को परमाणु युद्ध का डर दिखाने की पुरानी कूटनीति पर वापस लौटने की कोशिश कर रहे हैं।
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