लखनऊ. वैश्विक स्तर पर खाड़ी देशों (Gulf Countries) में बढ़ते तनाव और युद्ध की आहट का सीधा असर अब नवाबों के शहर लखनऊ की गलियों और रसोई में दिखने लगा है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी किल्लत ने शहर के जायके और छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि जहाँ कभी गैस चूल्हों की नीली लौ जलती थी, वहाँ अब कोयले का धुआं और इंडक्शन की गूंज सुनाई दे रही है।
1. ठेलों पर लगा ताला, रेस्टोरेंट का आधा शटर गिरा
लखनऊ के प्रमुख व्यापारिक केंद्र जैसे भूतनाथ, राजाजीपुरम और अलीगंज में सन्नाटा पसरने लगा है। कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई ठप होने से चाय, चाट और पूड़ी-सब्जी के ठेले बंद होने की कगार पर हैं।
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अंकित अरोड़ा (होटल संचालक): “तीन दिन से सिलेंडर नहीं मिला, कारोबार पूरी तरह ठप है।”
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निशा अग्रवाल (रेस्टोरेंट मालकिन): “किराया और स्टाफ का वेतन निकालना दूभर हो गया है, शाम होते ही रेस्टोरेंट बंद करना पड़ता है।”
2. ‘काला सोना’ बना कोयला: 100% तक बढ़ी कीमतें
गैस का विकल्प तलाश रहे दुकानदारों ने अब पारंपरिक भट्ठियों का रुख किया है, जिससे ईंधन के अन्य साधनों की कालाबाजारी और कीमतें आसमान छू रही हैं।
| ईंधन/उपकरण | सामान्य कीमत | मौजूदा संकट में कीमत |
| लोहे की भट्ठी | ₹500 – ₹800 | ₹2,000 – ₹3,000 |
| इमली का कोयला | ₹25 / किलो | ₹50 / किलो |
| ईंधन लकड़ी | ₹20 / किलो | ₹30 / किलो |
ऐशबाग और चिनहट जैसे इलाकों में भट्ठी खरीदने के लिए लोग एडवांस बुकिंग करा रहे हैं। जो भट्ठियां कभी कबाड़ समझी जाती थीं, आज उनकी मांग ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
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3. इंडक्शन कुकटॉप की मांग में 50% का उछाल
सिलेंडर की अनिश्चितता को देखते हुए घरेलू उपभोक्ताओं और छोटे दुकानदारों ने बिजली के उपकरणों पर भरोसा जताना शुरू कर दिया है। नाका मार्केट के विक्रेता आरके महेश्वरी बताते हैं कि इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री में अचानक 50% की बढ़ोत्तरी हुई है।
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पसंदीदा मॉडल: लोग विशेष रूप से ‘जाली वाले इंडक्शन’ की मांग कर रहे हैं ताकि उन पर रोटी भी सेंकी जा सके।
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बजट: ब्रांडेड इंडक्शन ₹2200 से ₹3300 के बीच बिक रहे हैं।
4. शादियों के सीजन (सहालग) पर बड़ा संकट
लखनऊ के कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े नीरज और अनूप यादव के अनुसार, शादियों में एक साथ कई पकवान बनाने होते हैं। गैस सिलेंडर न होने से लकड़ी की भट्ठियों पर खाना बन रहा है, जिससे समय दोगुना लग रहा है और स्वाद बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बन गई है। वहीं, मंडियाव क्षेत्र में चल रही टिफिन सेवाओं के बंद होने से बाहर रहकर पढ़ाई करने वाले छात्रों के सामने खाने का संकट खड़ा हो गया है।
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5. क्या है विशेषज्ञों की राय?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट तब तक बना रह सकता है जब तक खाड़ी देशों में तनाव कम नहीं होता और सप्लाई चेन बहाल नहीं होती। हालांकि, 16 मार्च के बाद सहालग (शादियों का सीजन) खत्म होने पर मांग में थोड़ी गिरावट आ सकती है, जिससे कीमतों में मामूली सुधार की उम्मीद है।
आम आदमी के लिए क्या हैं विकल्प? (Smart Tips)
अगर आप भी इस संकट से जूझ रहे हैं, तो ये तरीके मददगार हो सकते हैं:
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बैकअप तैयार रखें: इंडक्शन कुकटॉप एक अच्छा निवेश साबित हो सकता है।
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सोलर कुकिंग: लंबे समय के समाधान के लिए सोलर कुकर पर विचार करें।
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बुकिंग में सावधानी: घरेलू सिलेंडर की बुकिंग समय से पहले करें ताकि ‘रिफिल’ में देरी न हो।
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