लखनऊ | सोमवार, 13 अप्रैल 2026
वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन और परंपराओं को लेकर चल रही कानूनी जंग में आज सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि मंदिर की वर्तमान व्यवस्था में फिलहाल कोई भी ‘संरचनात्मक बदलाव’ नहीं किया जाएगा।
⏳ 2 हफ्ते के लिए टली सुनवाई, स्टेटस रिपोर्ट पर फंसा पेंच
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। मैनेजमेंट कमेटी की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कोर्ट को बताया कि उन्हें मामले की विस्तृत ‘स्टेटस रिपोर्ट’ रविवार देर रात प्राप्त हुई है। उन्होंने इस रिपोर्ट का अध्ययन करने और जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए सुनवाई को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है।
⚖️ कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “व्यवस्था यथावत रहेगी”
सुनवाई के दौरान CJI ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत वर्तमान में मंदिर के कामकाज के तरीके में किसी भी बड़े बदलाव के पक्ष में नहीं है। इसका अर्थ यह है कि मंदिर की पुरानी परंपराएं और वर्तमान प्रशासनिक निगरानी की स्थिति अगली सुनवाई तक वैसी ही बनी रहेगी। इससे पूर्व दिसंबर 2025 में कोर्ट ने मंदिर में ‘विशेष वीआईपी पूजा’ के नाम पर होने वाली व्यावसायिकता और देवता के विश्राम में बाधा डालने पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
🚩 सेवायतों की आपत्ति और विवाद के मुख्य बिंदु
यह मामला मुख्य रूप से मंदिर के सेवायतों (पुजारियों) द्वारा सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित 12 सदस्यीय हाई पावर्ड कमेटी (HPC) के हस्तक्षेप के खिलाफ दायर किया गया है। सेवायतों का आरोप है कि कमेटी के कुछ फैसले ‘ठाकुर जी’ की सेवा-पद्धति और सदियों पुरानी परंपराओं के विरुद्ध हैं:
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देहरी पूजा पर रोक: मंदिर की चौखट (देहरी) की पारंपरिक पूजा को बंद किए जाने का सेवायत कड़ा विरोध कर रहे हैं।
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दर्शन के समय में बदलाव: सेवायतों का तर्क है कि भगवान के जागने, भोग और शयन का समय ऋतुओं के अनुसार तय होता है, जिसमें प्रशासनिक हस्तक्षेप गलत है।
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प्रबंधन और नियुक्तियां: सेवायतों ने मंदिर के गोस्वामी समुदाय की नियुक्तियों में बाहरी हस्तक्षेप को लेकर भी याचिका दी है।
🏛️ बैकग्राउंड: ऑर्डिनेंस और हाई पावर्ड कमेटी
उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘यूपी श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट ऑर्डिनेंस, 2025’ के जरिए मंदिर का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस अध्यादेश के कुछ हिस्सों पर रोक लगा दी और इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति गठित कर दी थी। यह समिति फिलहाल मंदिर के दैनिक कार्यों, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और कॉरिडोर निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं की देखरेख कर रही है।
🔎 आगे क्या?
अगली सुनवाई अब अप्रैल के अंतिम सप्ताह में होने की संभावना है। इसमें स्टेटस रिपोर्ट पर विस्तृत बहस होगी और यह तय किया जाएगा कि मंदिर की परंपराओं की रक्षा करते हुए श्रद्धालुओं के लिए बेहतर प्रबंधन कैसे सुनिश्चित किया जाए।
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