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महाराष्ट्र: बीड के स्कूल में ‘सीक्रेट चर्च’ का पर्दाफाश? नशीली दवाएं और प्रचार सामग्री मिलने से हड़कंप

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

मुंबई | सोमवार, 13 अप्रैल 2026

महाराष्ट्र के बीड जिले के अंबाजोगई इलाके में एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान उस समय विवादों के घेरे में आ गया, जब वहां कथित रूप से ईसाई धर्म के प्रचार और संदिग्ध गतिविधियों का मामला सामने आया। स्थानीय संगठनों द्वारा स्कूल परिसर में की गई औचक जांच के बाद इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, अंबाजोगई स्थित स्वामी रामानंद तीर्थ शासकीय अस्पताल परिसर में संचालित एक स्कूल को लेकर स्थानीय सकल हिंदू समाज के कार्यकर्ताओं को पिछले कुछ समय से गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं। आरोप था कि स्कूल की आड़ में यहां धार्मिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

जब कार्यकर्ताओं की टीम ने स्कूल का निरीक्षण किया, तो वहां “एस.आई.एन. चर्च” (S.I.N. Church) नाम लिखी एक अलमारी मिली। इस अलमारी को खोलने पर जो सामग्री मिली, उसने सभी को हैरान कर दिया।

जांच में मिलीं ये संदिग्ध वस्तुएं

कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्कूल परिसर से निम्नलिखित सामग्रियां बरामद करने का दावा किया गया है:

  • धार्मिक साहित्य: भारी मात्रा में ईसाई धर्म से संबंधित प्रचार पुस्तकें और पैम्फलेट्स।

  • संदिग्ध दवाएं: कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अलमारी में कुछ ऐसी दवाएं मिली हैं जो नशीली हो सकती हैं, जिनका उपयोग छात्रों या अन्य लोगों पर किया जाना संदिग्ध है।

  • अन्य सामग्री: प्रार्थना से जुड़ी कुछ विशिष्ट वस्तुएं और दस्तावेज।

15 साल से चल रहा था खेल?

मामले में सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि यह गतिविधि हाल-फिलहाल की नहीं है। स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पिछले 15 वर्षों से हर रविवार को एक बाहरी व्यक्ति स्कूल आता था और वहां विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित करता था। आरोप है कि स्कूल के कुछ शिक्षक और कर्मचारी भी इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं।

प्रशासनिक एक्शन और अल्टीमेटम

घटना के बाद अंबाजोगई में आक्रोश व्याप्त है। सकल हिंदू समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है:

  1. दो दिन का समय: संस्थान प्रशासन को दोषियों पर कार्रवाई के लिए 48 घंटे का समय दिया गया है।

  2. आंदोलन की चेतावनी: यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो संस्थान के गेट पर उग्र धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

  3. ज्ञापन: उप-विभागीय अधिकारी (SDO) और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) को आधिकारिक शिकायत सौंप दी गई है।

संस्थान और पुलिस का पक्ष

विवाद बढ़ता देख संस्थान के अध्यक्ष ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी प्रकार के धार्मिक प्रचार की अनुमति नहीं है।” उन्होंने एक जांच समिति गठित करने और पुलिस प्रशासन का सहयोग करने की बात कही है।

वर्तमान में, पुलिस बरामद दवाओं की लैब जांच करवा रही है ताकि उनकी असल प्रकृति का पता चल सके। शिक्षा विभाग भी इस बात की जांच कर रहा है कि सरकारी अस्पताल परिसर जैसी संवेदनशील जगह पर इतने वर्षों से बाहरी गतिविधियों की अनुमति किसने दी।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।