मुंबई | बुधवार, 13 मई 2026
मुंबई के विक्रोली (पश्चिम) स्थित पार्कसाइट इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक 31 वर्षीय व्यक्ति ने 13 साल की मासूम बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया। यह मामला तब प्रकाश में आया जब पीड़िता के स्वास्थ्य बिगड़ने पर उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहाँ उसके गर्भवती होने की पुष्टि हुई।
घटना का घटनाक्रम: बेकरी की आड़ में हैवानियत
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी की पहचान नफीस अहमद अब्दुल रहमान उर्फ सलमान (31) के रूप में हुई है। नफीस स्थानीय ‘जनता बेकरी’ में काम करता था। पीड़िता अक्सर इस बेकरी में सामान लेने आती थी, जहाँ आरोपी ने उसे अपनी बातों में फँसाया।
बताया जा रहा है कि आरोपी ने जनवरी 2026 से मार्च 2026 के बीच बेकरी के पीछे ले जाकर नाबालिग के साथ कई बार जबरन दुष्कर्म किया। आरोपी ने लड़की को किसी को भी बताने पर जान से मारने की धमकी दी थी, जिसके कारण डर के मारे उसने घर पर कुछ नहीं कहा।
डॉक्टर की भूमिका और पुलिसिया कार्रवाई
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़िता को पेट दर्द और अन्य शारीरिक समस्याओं के कारण पारिवारिक डॉक्टर डॉ. सुबोध चावदाने के पास ले जाया गया। जांच के दौरान डॉक्टर ने पाया कि लड़की गर्भवती है।
डॉ. सुबोध ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए तुरंत मामले की गंभीरता को समझा और इसकी सूचना पार्कसाइट पुलिस को दी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए वरिष्ठ निरीक्षक संतोष घाटेकर के नेतृत्व में जाल बिछाया और आरोपी नफीस अहमद को दबोच लिया। आरोपी के खिलाफ POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
राजनीतिक और सामाजिक आक्रोश
घटना की सूचना मिलते ही पूर्व सांसद और भाजपा नेता किरीट सोमैया ने पार्कसाइट पुलिस स्टेशन का दौरा किया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मामले की पूरी जानकारी ली और मांग की कि आरोपी को फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए सख्त से सख्त सजा दिलाई जाए।
डॉ. सुबोध चावदाने ने समाज से अपील करते हुए कहा, “प्रशासन और समाज को अब पीड़िता के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है। ऐसी घटनाओं का एक बच्चे के मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है, हमें उसे इस सदमे से बाहर निकालने में मदद करनी होगी।”
सावधानियां (Fact-Check)
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पहचान की गोपनीयता: कानूनन (POCSO Act) पीड़िता की पहचान उजागर करना अपराध है। मीडिया और सोशल मीडिया पर बच्ची का नाम या फोटो साझा न करें।
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जागरूकता: यह घटना सिखाती है कि बच्चों को ‘गुड टच और बैड टच’ के बारे में शिक्षित करना कितना अनिवार्य है, चाहे आसपास का माहौल कितना भी परिचित क्यों न हो।
Matribhumisamachar


