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बांग्लादेश: 81 फीट ऊंची श्रीराम मूर्ति के प्रस्तावक हरिदास चंद्र तरनी दास मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा 4 दिन के रिमांड पर

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बांग्लादेश में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किए गए हरिदास चंद्र तरनी दास को ढाका कोर्ट ले जाती पुलिस।

ढाका । सोमवार, 13 जुलाई 2026

पड़ोसी देश बांग्लादेश से एक बड़ा और संवेदनशील मामला सामने आया है। गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी में 81 फीट ऊंची भगवान श्रीराम की भव्य मूर्ति के निर्माण का प्रस्ताव रखकर चर्चा में आए हरिदास चंद्र तरनी दास को बांग्लादेश पुलिस की क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर लिया है।

हरिदास को रविवार (12 जुलाई, 2026) की देर रात गाइबांधा के मध्य रामचंद्रपुर गांव स्थित श्री श्री राधा गोविंद काली मंदिर परिसर के पास से हिरासत में लिया गया। सोमवार को ढाका की एक अदालत ने उन्हें पूछताछ के लिए 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

क्या है पूरा मामला और CID के दावे?

बांग्लादेश सीआईडी की फाइनेंशियल क्राइम यूनिट ने हरिदास चंद्र तरनी दास के खिलाफ ढाका के उत्तम पश्चिम थाने में मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। सीआईडी के मुताबिक, जांच अधिकारियों को हरिदास के विभिन्न बैंक खातों और मोबाइल फाइनेंशियल सर्विस (MFS) अकाउंट्स में 9.35 करोड़ टका (लगभग 7.26 करोड़ भारतीय रुपये) के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के पुख्ता सबूत मिले हैं।

जांच एजेंसी का दावा है कि हरिदास के पास आय का कोई वैध या कानूनी जरिया नहीं है, इसके बावजूद देश के अलग-अलग हिस्सों से उनके खातों में भारी रकम जमा की गई और बाद में उसे निकाल लिया गया। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में हुंडी (Hundi) के जरिए स्थानीय और विदेशी मुद्रा की हेराफेरी और संगठित अपराधों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

‘तौहीद इस्लाम’ के नाम से भी जुड़े हैं तार

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स और सीआईडी के दावों के अनुसार, हरिदास साल 2010 में अवैध रूप से भारत में शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए गए थे। इसके बाद साल 2019 में उन्होंने कथित रूप से इस्लाम धर्म अपना लिया और अपना नाम बदलकर ‘तौहीद इस्लाम’ रख लिया था। जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि वह खुद को पूर्व प्रधानमंत्री का प्रोटोकॉल अधिकारी बताकर और प्रभावशाली लोगों के साथ छेड़छाड़ की गई (Edited) तस्वीरें दिखाकर लोगों का भरोसा जीतते थे।

अदालत में हरिदास ने दी सफाई

गिरफ्तारी के बाद जब सोमवार को हरिदास को ढाका मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, तो उन्होंने अपने बचाव में दलीलें पेश कीं। हरिदास ने कोर्ट से कहा:

“मैं पहले एक किसान था और अब मंदिर का प्रबंधन संभालता हूं। अगर मंदिर की देखरेख करना ही मुझे अपराधी बनाता है, तो मैं कुछ नहीं कर सकता। खातों में मौजूद पैसा किसी अवैध गतिविधि का नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में दिया गया दान है।”

उनके वकीलों ने कोर्ट से जमानत की गुहार लगाते हुए कहा कि भक्तों द्वारा दिए गए दान को मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में नहीं रखा जा सकता। हालांकि, अदालत ने जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें 4 दिन की रिमांड पर सौंप दिया।

हिंदू-बौद्ध-ईसाई यूनिटी काउंसिल ने की निंदा

इस कार्रवाई के बाद बांग्लादेश में धार्मिक और सामाजिक तनाव बढ़ गया है। ‘बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई यूनिटी काउंसिल’ ने हरिदास चंद्र की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए पुलिस की इस कार्रवाई की तीखी आलोचना की है। दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों से श्री श्री राधा गोविंद काली मंदिर परिसर में बनने वाली 81 फीट ऊंची भगवान राम की मूर्ति को लेकर इलाके में पहले से ही विवाद और भारी तनाव की स्थिति बनी हुई थी।

सुरक्षा के लिहाज से पुलिस ने मंदिर परिसर के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया है और स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. हरिदास चंद्र तरनी दास कौन हैं?

हरिदास चंद्र तरनी दास बांग्लादेश के गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी में स्थित श्री श्री राधा गोविंद काली मंदिर के प्रस्तावक और आयोजक हैं, जो वहां 81 फीट ऊंची भगवान श्रीराम की मूर्ति बनवाने की योजना के कारण चर्चा में आए थे।

2. हरिदास चंद्र दास को क्यों गिरफ्तार किया गया है?

उन्हें बांग्लादेश की सीआईडी ने करीब 9.35 करोड़ टका (7.26 करोड़ भारतीय रुपये) के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, हुंडी कारोबार और मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के आरोपों के तहत गिरफ्तार किया है।

3. तौहीद इस्लाम कौन है और इसका हरिदास से क्या संबंध है?

बांग्लादेश पुलिस और सीआईडी का दावा है कि हरिदास चंद्र तरनी दास ने ही साल 2019 में धर्म परिवर्तन कर अपना नाम तौहीद इस्लाम रख लिया था।

4. इस मामले पर मंदिर प्रबंधन और हरिदास का क्या कहना है?

हरिदास और उनके वकीलों का कहना है कि उनके बैंक खातों में आया पैसा देश-विदेश के श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर निर्माण और प्रबंधन के लिए दिया गया दान (Donation) है, जिसका किसी भी अवैध कार्य से संबंध नहीं है।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और बांग्लादेश पुलिस (CID) द्वारा जारी आधिकारिक बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। मामले की न्यायिक जांच जारी है।

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