जनरल उपेंद्र द्विवेदी का विजन: भारत के लिए क्यों जरूरी है अलग रॉकेट-सह-मिसाइल फोर्स?
नई दिल्ली. भारतीय थल सेना प्रमुख, जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में (जनवरी 2026) भारत के लिए एक समर्पित ‘रॉकेट-सह-मिसाइल फोर्स’ (Rocket-cum-Missile Force) बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। यह कदम आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप और पड़ोसियों की सैन्य संरचना को देखते हुए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
1. चीन और पाकिस्तान की तर्ज पर आवश्यकता
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चीन की ‘PLARF’: चीन की ‘पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स’ (PLARF) दुनिया की सबसे शक्तिशाली मिसाइल ताकतों में से एक है। यह चीन के परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के मिसाइल हमलों का संचालन करती है।
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पाकिस्तान का कदम: पाकिस्तान ने भी हाल के वर्षों में अपनी अलग रॉकेट फोर्स का गठन किया है। जनरल द्विवेदी के अनुसार, जब दोनों दुश्मन देशों के पास ऐसी विशेष इकाई है, तो भारत के लिए यह “समय की मांग” है।
2. रॉकेट फोर्स के गठन के मुख्य कारण
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नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर: आधुनिक युद्ध अब आमने-सामने की लड़ाई से हटकर दूर से सटीक हमले (Precision Strikes) की ओर बढ़ गया है। रॉकेट फोर्स के जरिए बिना सैनिकों को जोखिम में डाले दुश्मन के बुनियादी ढांचे को नष्ट किया जा सकता है।
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एकीकृत प्रहार प्रणाली: वर्तमान में रॉकेट और मिसाइलों के बीच का अंतर कम हो गया है। एक समर्पित बल इन दोनों को एक ‘सिंगल स्ट्राइक इकोसिस्टम’ में लाएगा, जिससे इनकी मारक क्षमता और समन्वय में सुधार होगा।
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निवारण (Deterrence): यह बल एक ‘कन्वेंशनल डिटरेंस’ (पारंपरिक निवारण) के रूप में कार्य करेगा, जो परमाणु युद्ध की स्थिति पैदा किए बिना दुश्मन को कड़ा जवाब देने में सक्षम होगा।
3. भारत की शक्ति का मुख्य आधार (प्रस्तावित हथियार)
इस फोर्स में भारत के सबसे घातक स्वदेशी हथियारों को शामिल करने की योजना है:
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पिनाका (Pinaka): मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, जिसकी रेंज अब 120-150 किमी तक बढ़ाई जा रही है।
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प्रलय (Pralay): कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM), जो विशेष रूप से चीन की सीमाओं के लिए तैयार की गई है।
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ब्रह्मोस (BrahMos): दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल।
4. संरचनात्मक और रणनीतिक लाभ
| पहलू | विवरण |
| कमांड संरचना | यह सेना के आर्टिलरी रेजिमेंट का हिस्सा हो सकती है या इसे सीडीएस (CDS) के तहत एक त्रि-सेवा (Tri-service) कमांड बनाया जा सकता है। |
| मारक क्षमता | 150 किमी से लेकर 1500 किमी तक के लक्ष्यों को भेदने की क्षमता। |
| लक्ष्य | दुश्मन के हवाई अड्डे, रडार स्टेशन, संचार केंद्र और ईंधन डिपो। |
5. भविष्य की चुनौतियां और निष्कर्ष
इस बल के गठन के लिए न केवल हथियारों की, बल्कि आधुनिक ISR (Intelligence, Surveillance, and Reconnaissance) क्षमताओं की भी आवश्यकता होगी। जनरल द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि भारत अब “स्मार्ट सोच, गहरी मार और तेज गति” वाली सेना बनने की ओर अग्रसर है। यह रॉकेट फोर्स भारत की उत्तरी (चीन) और पश्चिमी (पाकिस्तान) सीमाओं पर शक्ति संतुलन को भारत के पक्ष में करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
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