पटना. मकर संक्रांति 2026 के अवसर पर बिहार की राजनीति में एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने भविष्य के नए समीकरणों की ओर इशारा कर दिया है। राजद (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव बुधवार को अपने बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव के आवास पर ‘दही-चूड़ा भोज’ में शामिल होने पहुंचे। करीब 8 महीने के लंबे अलगाव और पार्टी से निष्कासन के बाद, पिता-पुत्र की इस सार्वजनिक मुलाकात ने बिहार के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
“RJD का विलय JJD में होगा” – तेज प्रताप का चौंकाने वाला बयान
भोज के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए तेज प्रताप यादव ने एक ऐसा बयान दिया जिसने सबको हैरान कर दिया। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अपनी पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ का विलय राजद में करेंगे, तो उन्होंने पलटकर कहा:
“राजद का विलय जनशक्ति जनता दल (JJD) में होगा। लालू प्रसाद यादव की असली पार्टी JJD ही है, क्योंकि यह जन की शक्ति से जुड़ी है।”
तेज प्रताप ने अपने छोटे भाई और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि राजद अब “जयचंदों” (गद्दारों) से घिर गई है और तेजस्वी को चाहिए कि वे अपनी पार्टी का विलय JJD में कर लें।
लालू यादव का रुख: “परिवार के साथ रहें तेज”
पिछले साल मई में तेज प्रताप को “गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार” के कारण राजद और परिवार से बेदखल करने वाले लालू यादव आज नरम दिखाई दिए। उन्होंने मीडिया से कहा:
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“तेज प्रताप से कोई नाराजगी नहीं है। वह मेरा बेटा है और उसे परिवार के साथ ही रहना चाहिए।”
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“भोज एक सामाजिक मिलन है, इसमें राजनीति नहीं देखनी चाहिए।”
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तेजस्वी की गैर-मौजूदगी और बीजेपी की एंट्री
इस पूरे घटनाक्रम में दो बातें सबसे अधिक चर्चा में रहीं:
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तेजस्वी यादव का न आना: लालू यादव के आने के बावजूद तेजस्वी यादव इस भोज में शामिल नहीं हुए। इस पर तेज प्रताप ने तंज कसते हुए कहा, “वह थोड़ा लेट सोकर उठते हैं, शायद जयचंदों ने उन्हें रोक रखा होगा।”
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NDA नेताओं का जमावड़ा: तेज प्रताप के घर केवल लालू ही नहीं, बल्कि बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा (BJP), राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और पशुपति पारस जैसे दिग्गज नेता भी पहुंचे। बीजेपी नेताओं की मौजूदगी ने इन अटकलों को हवा दे दी है कि क्या तेज प्रताप भविष्य में NDA का दामन थाम सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषण: क्या है भविष्य की रणनीति?
हालिया विधानसभा चुनाव में राजद की करारी हार (मात्र 25 सीटें) के बाद लालू परिवार में एकजुटता की कोशिशें तो हो रही हैं, लेकिन तेज प्रताप के “विलय वाले ऑफर” ने नई कलह के संकेत दे दिए हैं।
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JJD का विस्तार: तेज प्रताप अब अपनी पार्टी को बिहार के बाहर, विशेषकर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी उतारने की योजना बना रहे हैं।
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दबाव की राजनीति: विशेषज्ञों का मानना है कि तेज प्रताप इस तरह के आयोजनों के जरिए तेजस्वी यादव पर दबाव बनाना चाहते हैं ताकि राजद में उनकी ससम्मान वापसी हो सके।
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