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‘पंडित’ शब्द पर छिड़ा संग्राम, यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा के एक सवाल ने बढ़ाई सरकार की टेंशन; डिप्टी सीएम ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

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यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा का विवादित प्रश्न पत्र और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की फोटो।

लखनऊ. उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला पेपर लीक का नहीं, बल्कि हिंदी के एक प्रश्न के ‘विकल्प’ (Options) को लेकर है। सोशल मीडिया पर इस प्रश्न के वायरल होते ही ब्राह्मण समाज और विभिन्न संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिसके बाद प्रदेश सरकार एक्शन मोड में आ गई है।

क्या है पूरा मामला? (The Disputed Question)

विवाद की जड़ हिंदी विषय का प्रश्न संख्या 3 है। इस प्रश्न में अभ्यर्थियों से एक वाक्यांश के लिए एक शब्द पूछा गया था:

प्रश्न: “अवसर के अनुसार बदल जाने वाला” के लिए उपयुक्त शब्द क्या है?

विकल्प: (A) पंडित, (B) अवसरवादी, (C) निष्कपट, (D) सदाचारी।

व्याकरण की दृष्टि से इसका सही उत्तर ‘अवसरवादी’ है, लेकिन विकल्प (A) में ‘पंडित’ शब्द का प्रयोग किए जाने पर आपत्ति जताई गई है। आलोचकों का तर्क है कि ‘पंडित’ शब्द विद्वत्ता और सम्मान का प्रतीक है, उसे ‘अवसरवादी’ (गिरगिट की तरह रंग बदलने वाला) के विकल्प के रूप में रखना एक विशिष्ट वर्ग की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला है।

नवीनतम समाचारों के लिए: matribhumisamachar.com/latest-news

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की सख्त चेतावनी

मामला तूल पकड़ते ही उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस प्रकार की संवेदनहीनता को बर्दाश्त नहीं करेगी।

  • जांच के निर्देश: डिप्टी सीएम ने भर्ती बोर्ड और शिक्षा विशेषज्ञों की उस टीम की जांच के आदेश दिए हैं जिसने यह प्रश्नपत्र तैयार किया था।

  • दोषियों पर होगी कार्रवाई: उन्होंने कहा कि किसी भी जाति, समुदाय या परंपरा का अपमान करने वाले शब्दों को चयन प्रक्रिया में कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए। जो भी इसके लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उस पर कड़ी कार्रवाई होगी।

  • सामाजिक समरसता: सरकार ने संदेश दिया है कि परीक्षाओं में भाषाई मर्यादा और सामाजिक सम्मान सर्वोपरि है।

उत्तर प्रदेश की अन्य खबरें: matribhumisamachar.com/uttar-pradesh

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

जैसे ही प्रश्नपत्र की तस्वीर वायरल हुई, सोशल मीडिया यूजर्स ने भर्ती बोर्ड की ‘मॉडरेशन’ प्रक्रिया पर सवाल उठा दिए।

  • नेटीजन्स का तर्क: कई यूजर्स ने इसे “मानसिक दीवालियापन” करार दिया, तो कुछ ने इसे जानबूझकर की गई शरारत बताया।

  • छात्रों की चिंता: अभ्यर्थियों का कहना है कि बार-बार विवादों में रहने से भर्ती प्रक्रिया की शुचिता प्रभावित होती है और उनका ध्यान मूल परीक्षा से भटकता है।

भर्ती बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल (Analysis)

किसी भी बड़ी परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए एक विशेषज्ञ पैनल होता है। इसके बाद एक ‘मॉडरेटर’ प्रश्नों की समीक्षा करता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि:

  1. प्रश्न और उत्तर तकनीकी रूप से सही हों।

  2. भाषा सरल और स्पष्ट हो।

  3. सबसे महत्वपूर्ण: कोई भी प्रश्न किसी भी धर्म, जाति या लिंग की भावनाओं को आहत न करे।

इस मामले में ‘पंडित’ शब्द का चयन यह दर्शाता है कि प्रश्नपत्र की अंतिम समीक्षा (Final Review) के दौरान बड़ी चूक हुई है।

शिक्षा और भर्ती अपडेट: matribhumisamachar.com/education-and-jobs

क्या होगा आगे? (What’s Next?)

सरकार के कड़े रुख के बाद अब निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:

  • प्रश्न का विलोपन: विवादित प्रश्न को मूल्यांकन प्रक्रिया से बाहर किया जा सकता है।

  • पैनल पर प्रतिबंध: जिस एजेंसी या विशेषज्ञों ने यह सेट तैयार किया था, उन्हें भविष्य के लिए ‘ब्लैकलिस्ट’ किया जा सकता है।

  • नई गाइडलाइंस: भर्ती बोर्ड भविष्य की परीक्षाओं के लिए ‘शब्दावली चयन’ पर नई गाइडलाइंस जारी कर सकता है।

निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती परीक्षा लाखों युवाओं के भविष्य का सवाल है। ऐसे में एक छोटे से विकल्प की लापरवाही ने न केवल सरकार के लिए राजनीतिक असहजता पैदा की है, बल्कि परीक्षा के आयोजन पर भी उंगली उठाई है। अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट और दोषियों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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