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टोंक छात्र आत्महत्या मामला: क्या ‘धर्मांतरण’ का दबाव बना सुसाइड की वजह? जानें अब तक की जांच का सच

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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जयपुर | गुरुवार, 14 मई 2026

राजस्थान के टोंक जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत न्यू महावीर नगर में रहने वाले नाबालिग स्कूली छात्र कुणाल (नाम परिवर्तित/सांकेतिक) ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। पहली नजर में पुलिस इसे किशोरवय प्रेम प्रसंग (Teenage Love Affair) से जोड़कर देख रही थी, लेकिन मृतक की मां और भाई द्वारा लगाए गए सनसनीखेज आरोपों ने इस मामले को ‘धर्मांतरण के दबाव’ और ‘मानसिक प्रताड़ना’ के एक गंभीर अपराध में बदल दिया है।

परिजनों के आरोपों में सुधार और स्पष्टीकरण

शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में इसे केवल एकतरफा प्रेम बताया जा रहा था, लेकिन परिजनों ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे हैं:

  • खतने का दावा: मृतक के भाई ने आरोप लगाया है कि नाबालिग इतना अधिक मानसिक दबाव में था कि उसने लड़की के कहने पर अपना खतना (Circumcision) तक कर लिया था। यह दावा इस मामले को एक सामान्य सुसाइड से अलग ‘धार्मिक कट्टरता’ की ओर ले जाता है।

  • प्रशासनिक अनदेखी: मृतक की मां, जो स्वयं जेल विभाग में हैं, ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे की सुरक्षा के लिए कई बार उच्चाधिकारियों से ट्रांसफर (स्थानांतरण) की मांग की थी, जिसे अनसुना कर दिया गया।

  • फोन रिकॉर्डिंग्स: परिवार का दावा है कि मृतक के फोन में ऐसी कई रिकॉर्डिंग्स मौजूद हैं जिनमें उसे और उसके माता-पिता को गंदी गालियां दी गई हैं और इस्लाम कबूल करने के लिए धमकाया गया है।

पुलिस जांच और साक्ष्य

कोतवाली थाना अधिकारी भंवर लाल वैष्णव के नेतृत्व में पुलिस की जांच वर्तमान में दो मुख्य बिंदुओं पर केंद्रित है:

  1. मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम: पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ‘खतने’ के दावे की पुष्टि केवल मेडिकल रिपोर्ट से ही हो पाएगी।

  2. डिजिटल फॉरेंसिक: छात्र के मोबाइल फोन को जब्त कर लिया गया है। रात के 3 बजे आने वाली कॉल्स और धमकियों वाले मैसेज की बारीकी से जांच की जा रही है।

विशेष नोट: पुलिस का कहना है कि परिजनों की नामजद रिपोर्ट के आधार पर संदिग्धों से पूछताछ जारी है, और साक्ष्य मिलने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।