देहरादून. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून एक बार फिर आध्यात्मिक और ज्योतिषीय चर्चाओं का केंद्र बनने जा रही है। इस 8वें महाकुंभ में देश-विदेश के लगभग 500 से अधिक ख्याति प्राप्त ज्योतिषी, वास्तु शास्त्री और हस्तरेखा विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
-
मुख्य उद्देश्य: प्राचीन ज्योतिष विद्या को अंधविश्वास से दूर कर एक वैज्ञानिक आधार प्रदान करना।
-
विशेष चर्चा: इस बार के महाकुंभ का मुख्य विषय “विश्व शांति और खगोलीय गणनाएं” रखा गया है।
2. ज्योतिष महाकुंभ का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
सनातन धर्म में ज्योतिष को ‘वेदों का नेत्र’ (Ved Purusha’s Eyes) माना गया है। इस महाकुंभ का महत्व निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:
-
काल गणना का केंद्र: हिंदू धर्म में शुभ कार्यों के लिए ‘मुहूर्त’ का विशेष स्थान है। यह महाकुंभ आने वाले वर्ष के त्योहारों और ग्रहों की स्थिति पर सर्वसम्मत निर्णय लेने का मंच है।
-
ज्ञान का आदान-प्रदान: यहाँ ऋषि-परंपरा से चले आ रहे गूढ़ ज्ञान और आधुनिक कंप्यूटर आधारित ज्योतिष (Software Astrology) के बीच सामंजस्य बिठाने पर शोध होता है।
-
जन कल्याण: आम जनता के लिए निःशुल्क परामर्श शिविर लगाए जाते हैं, जहाँ लोग अपनी समस्याओं का आध्यात्मिक समाधान पाते हैं।
यह भी पढ़ें : 1963 की गणतंत्र दिवस परेड में RSS की भागीदारी: नेहरू के निमंत्रण की पूरी कहानी
3. इस बार क्या है खास? (Key Highlights of 8th Edition)
-
नारी शक्ति: पहली बार महिला ज्योतिषियों के लिए एक विशेष सत्र “स्त्री शक्ति और ज्योतिष” आयोजित किया जा रहा है।
-
पर्यावरण और ग्रह: जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के पूर्वानुमान में ज्योतिष की भूमिका पर विशेष शोध पत्र पढ़े जाएंगे।
-
युवा पीढ़ी का जुड़ाव: इस बार IIT और IIM जैसे संस्थानों के छात्रों को भी आमंत्रित किया गया है ताकि वे डेटा साइंस और ज्योतिष के अंतर्संबंधों को समझ सकें।
4. देहरादून ही क्यों?
देहरादून और ऋषिकेश-हरिद्वार का क्षेत्र ‘देवभूमि’ का प्रवेश द्वार है। यहाँ की ऊर्जा और हिमालय की निकटता साधकों के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है। ज्योतिष महाकुंभ के माध्यम से उत्तराखंड के ‘धार्मिक पर्यटन’ (Spiritual Tourism) को भी भारी बढ़ावा मिलता है।
Matribhumisamachar


