भोपाल. महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में किन्नर समुदाय के इतिहास का एक नया और स्वर्णिम अध्याय लिखा गया। लालघाटी स्थित वुड गार्डन में आयोजित भव्य ‘किन्नर धर्म सम्मेलन’ में हिमांगी सखी को देश की पहली किन्नर शंकराचार्य घोषित किया गया। संतों की गरिमामय उपस्थिति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनका विधि-विधान से पट्टाभिषेक संपन्न हुआ।
पुष्कर पीठ से संचालित होगा नया धार्मिक नेतृत्व
किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने इस ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा करते हुए बताया कि हिमांगी सखी अब राजस्थान स्थित पुष्कर पीठ की कमान संभालेंगी। उल्लेखनीय है कि इस पीठ को देश की पहली ‘किन्नर शंकराचार्य पीठ’ के रूप में स्थापित किया गया है।
मूल रूप से मुंबई की रहने वाली हिमांगी सखी ‘मां वैष्णो किन्नर अखाड़ा’ की प्रमुख हैं और वे विश्व की पहली किन्नर भागवत कथा वाचक के रूप में पहले ही ख्याति प्राप्त कर चुकी हैं।
60 किन्नरों की ‘घर वापसी’ का दावा
इस सम्मेलन में धार्मिक विमर्श के साथ-साथ एक बड़ा सामाजिक कदम भी उठाया गया। आयोजकों के अनुसार, विभिन्न परिस्थितियों वश धर्म परिवर्तन कर चुके 60 किन्नरों ने विधिवत शुद्धिकरण प्रक्रिया के बाद पुनः हिंदू धर्म स्वीकार किया। इसे समुदाय के भीतर अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने के एक बड़े अभियान के रूप में देखा जा रहा है।
धार्मिक नियुक्तियों की नई श्रृंखला
किन्नर समाज को धार्मिक मुख्यधारा में सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई अन्य महत्वपूर्ण पदों की भी घोषणा की गई:
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जगद्गुरु: काजल ठाकुर (भोपाल), तनीषा (राजस्थान), संजना (भोपाल) और संचिता (महाराष्ट्र)।
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महामंडलेश्वर: सरिता भार्गव, मंजू, पलपल, रानी ठाकुर और सागर।
विवादों के बीच एकजुटता का संदेश
पिछले कुछ समय से किन्नर समुदाय के भीतर ‘गद्दी’ और ‘धर्म परिवर्तन’ को लेकर चल रहे विवादों के बीच यह आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि हिमांगी सखी का पट्टाभिषेक न केवल किन्नर समाज को एक संगठित नेतृत्व प्रदान करेगा, बल्कि सनातन धर्म की समावेशी परंपरा को भी विश्व पटल पर मजबूती से रखेगा।
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