उत्तर भारत समेत पूरे देश में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इस मौसम में तापमान में गिरावट के साथ ही हमारी जीवनशैली और खान-पान भी बदल जाता है। सर्दियों में दो समस्याएं सबसे आम हैं— कान में अचानक उठा तेज दर्द और पाचन तंत्र का सुस्त पड़ जाना। आज के इस विशेष लेख में हम जानेंगे कि कैसे योग और रसोई में मौजूद मसालों की मदद से आप इन समस्याओं को जड़ से खत्म कर सकते हैं।
1. सर्दियों में कान का दर्द: कारण और घरेलू उपचार
सर्द हवाओं के सीधे संपर्क में आने से कान की नसों में संकुचन होता है, जिससे दर्द और संक्रमण (Otitis) का खतरा बढ़ जाता है।
घरेलू उपाय:
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सरसों तेल और लहसुन: यह सबसे प्रभावी उपाय है। 2 चम्मच सरसों के तेल में लहसुन की 2 कलियां जला लें। जब तेल गुनगुना रह जाए, तो इसकी 1-2 बूंदें कान में डालें। लहसुन के एंटी-बैक्टीरियल गुण संक्रमण को खत्म करते हैं।
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अदरक का रस: अदरक के ताजे रस की एक बूंद कान के बाहर चारों ओर लगाने से सूजन कम होती है। (ध्यान रहे, कान के अंदर सीधे रस डालने से बचें)।
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जैतून का तेल (Olive Oil): यदि कान में खुश्की की वजह से दर्द है, तो हल्का गर्म जैतून का तेल लुब्रिकेंट का काम करता है।
2. सुस्त पाचन और कब्ज का समाधान
सर्दियों में हमारा ‘मेटाबॉलिज्म’ धीमा हो जाता है और शारीरिक सक्रियता कम होने से गैस, एसिडिटी और कब्ज की समस्या बढ़ जाती है।
घरेलू उपाय:
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अजवाइन और काला नमक: गुनगुने पानी के साथ अजवाइन और चुटकी भर काला नमक लेने से गैस में तुरंत राहत मिलती है।
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अदरक और नींबू की चाय: भोजन के बाद अदरक के छोटे टुकड़े पर नींबू निचोड़कर खाने से जठराग्नि (Digestive fire) प्रदीप्त होती है।
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तांबा और गुनगुना पानी: सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना पाचन तंत्र की सफाई के लिए रामबाण है।
3. रामबाण योगासन: ठंड की बीमारियों के लिए
योग न केवल शरीर को गर्म रखता है, बल्कि आंतरिक अंगों की मालिश भी करता है।
पाचन के लिए:
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वज्रासन: यह इकलौता आसन है जो भोजन के तुरंत बाद किया जा सकता है। यह रक्त संचार को पेट की ओर बढ़ाता है।
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पवनमुक्तासन: पेट की गैस और भारीपन को दूर करने के लिए यह सबसे बेहतरीन आसन है।
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धनुरासन: यह पेट की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है और कब्ज से राहत देता है।
कान और नसों की मजबूती के लिए:
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कर्णपीड़ासन: यह विशेष रूप से कान की समस्याओं और सुनने की क्षमता में सुधार के लिए जाना जाता है।
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भ्रामरी प्राणायाम: कान में गूंजने वाली ध्वनि (Tinnitus) और ठंड के कारण होने वाले तनाव को कम करने के लिए भ्रामरी का अभ्यास प्रतिदिन 5-10 बार करें।
4. बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
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कान ढककर रखें: बाहर निकलते समय मफलर या टोपी का प्रयोग करें। ठंडी हवा सीधे कान में न जाने दें।
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फाइबर युक्त भोजन: ठंड में तली-भुनी चीजों के बजाय बथुआ, मेथी और पालक जैसी फाइबर वाली सब्जियां खाएं।
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हाइड्रेशन: प्यास कम लगने के बावजूद पानी का पर्याप्त सेवन करें, ताकि पाचन सुचारू रहे।
नोट : विशेषज्ञों की सलाह को ही अंतिम मानें
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