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अकाल तख्त का बड़ा फैसला: मुख्यमंत्री भगवंत मान ‘गुरु-द्रोही’ घोषित, सिख समुदाय से नाता तोड़ने की अपील

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चंडीगढ़ । मंगलवार, 16 जून 2026

पंजाब में अगले साल (2027) होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की राजनीति में एक अभूतपूर्व भूचाल आ गया है। सिखों की सर्वोच्च धार्मिक और अस्थाई संस्था, श्री अकाल तख्त साहिब ने एक कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘गुरु-द्रोही’ (गुरु का दोषी) और ‘पंथ विरोधी’ घोषित कर दिया है। इसके साथ ही अकाल तख्त ने समूचे सिख समुदाय (खालसा पंथ) से अपील की है कि वे मुख्यमंत्री से किसी भी प्रकार का सामाजिक या धार्मिक संबंध न रखें।

क्या है पूरा मामला और वीडियो विवाद?

यह विवाद तब गहराया जब सिख श्रद्धालुओं को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों और एक सोशल मीडिया वीडियो के मामले में भगवंत मान को अकाल तख्त द्वारा तलब किया गया था। वह 15 जनवरी को अकाल तख्त के सामने पेश भी हुए थे। विवाद के केंद्र में एक वीडियो था, जिसमें मुख्यमंत्री जैसा दिखने वाला एक व्यक्ति सिख गुरुओं की तस्वीरों पर शराब छिड़कता हुआ दिखाई दे रहा था।

  • मुख्यमंत्री का पक्ष: भगवंत मान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया था कि यह वीडियो नकली है और इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा डीपफेक तकनीक के जरिए उनकी छवि खराब करने के लिए बनाया गया है।

  • फॉरेंसिक जांच में हुआ खुलासा: सोमवार को पांच सिंह साहिबानों (उच्च पुजारियों) की महत्वपूर्ण बैठक के बाद अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने मीडिया को बताया कि मुख्यमंत्री ने वीडियो को AI-जनित साबित करने के लिए छह महीने का समय मांगा था, लेकिन कोई सबूत नहीं दिया। इसके बाद अकाल तख्त सचिवालय ने भारत सरकार से मान्यता प्राप्त दो स्वतंत्र प्रयोगशालाओं (Forensic Labs) से वीडियो की जांच करवाई, जिसमें यह वीडियो पूरी तरह असली पाया गया।

जत्थेदार कुलदीप सिंह गरगज ने कहा:

“मुख्यमंत्री का पद बेहद सम्मानजनक होता है, लेकिन भगवंत मान ने अकाल तख्त साहिब जैसी सर्वोच्च संस्था के सामने झूठ बोला। उन्होंने गुरु के सामने खोट किया है, इसलिए ‘पंथ’ ने आज उन्हें गुरु-विरोधी घोषित किया है।”

‘बेअदबी कानून 2026’ पर भी टकराई सरकार और अकाल तख्त

भगवंत मान सिर्फ इस वीडियो विवाद में ही नहीं घिरे हैं, बल्कि उनकी सरकार द्वारा हाल ही में पारित किए गए ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026’ को लेकर भी अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के साथ उनका सीधा टकराव हो गया है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अप्रैल 2026 में इस बिल को विधानसभा से पास करवाकर राज्यपाल गुलाब चंद्र कटारिया से भी मंजूरी दिलवा दी थी। इस कानून के तहत गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों के लिए उम्रकैद और 25 लाख रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

अकाल तख्त की आपत्ति क्या है?

अकाल तख्त के जत्थेदार का कहना है कि पंजाब सरकार ने इस संवेदनशील कानून को बनाने से पहले सिख समुदाय, धार्मिक विद्वानों या SGPC से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया। तख्त का आरोप है कि इस कानून के कुछ नियम ऐसे हैं जो सिख मर्यादा और पंथ की भावनाओं के खिलाफ हैं और इससे समुदाय में दरार पैदा हो सकती है। जत्थेदार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार के पास पंथ से जुड़े धार्मिक विषयों पर सीधे कानून बनाने का कोई अधिकार नहीं है।

पूरी कैबिनेट को समन:

इस विधायी टकराव के मद्देनजर, अकाल तख्त ने बेहद सख्त कदम उठाते हुए पंजाब कैबिनेट के सभी मंत्रियों को 29 जून 2026 को अकाल तख्त साहिब के सामने पेश होने के लिए तलब किया है

इस्तीफे की उठी मांग: बैकफुट पर आम आदमी पार्टी

इस फैसले के तुरंत बाद पंजाब की सियासत गरमा गई है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से तुरंत इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अकाल तख्त साहिब द्वारा ‘गुरु-द्रोही’ घोषित किए जाने के बाद मुख्यमंत्री मान अपना नैतिक अधिकार खो चुके हैं और उन्हें तुरंत पद छोड़ देना चाहिए।

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी (AAP) इस समय बचाव की मुद्रा में है। पार्टी ने तर्क दिया है कि फॉरेंसिक लैब की जांच से केवल यह साफ हुआ है कि वीडियो के साथ तकनीकी छेड़छाड़ नहीं हुई, लेकिन यह साबित नहीं होता कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति वास्तव में मुख्यमंत्री भगवंत मान ही हैं।

यह घटनाक्रम पंजाब की राजनीति को किस ओर ले जाएगा, यह 29 जून को कैबिनेट की पेशी के बाद और साफ हो पाएगा।

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