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पंजाब कांग्रेस में घमासान: राजा वडिंग को हटाने की मांग पर अड़े चन्नी और रंधावा, भूपेश बघेल की सुलह कोशिशों के बीच दिल्ली कूच की तैयारी

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चंडीगढ़ । मंगलवार, 7 जुलाई 2026

पंजाब में 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी कांग्रेस इस समय अपने ही नेताओं की अंतर्कलह से जूझ रही है। पार्टी हाईकमान द्वारा हाल ही में पंजाब इकाई के लिए नई चुनावी समितियों की घोषणा के बाद से शुरू हुआ असंतोष अब एक खुली बगावत का रूप ले चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा के नेतृत्व में विरोधी खेमा मौजूदा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को उनके पद से हटाने की मांग पर अड़ा हुआ है।

मोहाली में विरोधी गुट का शक्ति प्रदर्शन और बघेल से दूरी

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के पंजाब प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल सोमवार (6 जुलाई) को स्थिति को संभालने और सुलह का रास्ता निकालने के लिए चंडीगढ़ पहुंचे। लेकिन उनके आगमन से ठीक पहले मोहाली (खरड़) में चन्नी और रंधावा गुट ने एक बड़ी बैठक कर अपना शक्ति प्रदर्शन किया। इस बैठक में भारत भूषण आशु, परगट सिंह, और तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा जैसे कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

दिलचस्प बात यह है कि इस बैठक के बाद चन्नी समर्थकों ने सोशल मीडिया पर “एकता ही शक्ति है” (Unity is Strength) कैप्शन के साथ एक सामूहिक तस्वीर साझा की, जिससे राजा वडिंग नदारद थे। हालांकि, डैमेज कंट्रोल की कोशिश करते हुए खुद राजा वडिंग ने भी उसी बैठक की तस्वीरों को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर कर इसे ‘मिशन 2027’ की रणनीति बैठक करार दिया और किसी भी गुटबाजी से इनकार किया।

क्या हैं विरोधी खेमे की मुख्य मांगें?

गठित समितियों में चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति (Campaign Committee) का अध्यक्ष और सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर कमेटी (Core Committee) का प्रमुख बनाया गया है, जबकि राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष (PPCC Chief) पद पर बरकरार रखा गया है।

  1. नेतृत्व में बदलाव: चन्नी समर्थक चाहते थे कि चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए या फिर वडिंग को हटाकर किसी तीसरे न्यूट्रल चेहरे को कमान सौंपी जाए।

  2. दिल्ली जाने की जिद: सोमवार को जब भूपेश बघेल चंडीगढ़ में नेताओं से मिल रहे थे, तब चन्नी और रंधावा के नेतृत्व में असंतुष्ट नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने बघेल से मिलने के बजाय सीधे दिल्ली जाकर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे से मिलने का फैसला किया। विरोधी खेमे का साफ संकेत है कि उन्हें हाईकमान का मौजूदा फैसला मंजूर नहीं है।

राजा वडिंग का रुख और अनुशासनहीनता पर कार्रवाई

इस भारी विरोध के बीच राजा वडिंग ने खुद को मुख्यमंत्री पद की रेस से बाहर बताते हुए कहा है कि वह केवल संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। उन्होंने चन्नी को “कांग्रेस के सिर का ताज” बताते हुए कहा कि परिवार में मतभेद होते रहते हैं और जल्द ही सभी नेता एक ही मंच पर नजर आएंगे।

दूसरी ओर, बगावत की इस आग में अनुशासन का मुद्दा भी गरमा गया है। पंजाब कांग्रेस ने हाईकमान और केसी वेणुगोपाल के खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाजी करने के आरोप में पूर्व विधायक मदन लाल जलालपुर को कारण बताओ (Show-cause) नोटिस जारी कर 3 दिन में जवाब मांगा है।

पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है और विचारों की यह अभिव्यक्ति आंतरिक लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यदि आलाकमान ने जल्द ही कोई ठोस और सर्वमान्य फार्मूला नहीं निकाला, तो आगामी चुनावों में पार्टी को इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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