जम्मू | गुरुवार, 17 अप्रैल 2026
जम्मू-कश्मीर की राज्य जांच एजेंसी (SIA) ने नवंबर 2025 में दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए आत्मघाती हमले के मामले में एक सनसनीखेज खुलासा किया है। श्रीनगर की विशेष अदालत में दाखिल की गई चार्जशीट के अनुसार, कश्मीर से लेकर दिल्ली तक फैला एक ‘डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल’ सक्रिय था, जिसका उद्देश्य प्रतिबंधित आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (AGUH) को पुनर्जीवित करना और भारत के खिलाफ एक नया युद्ध छेड़ना था।
शिक्षित चेहरों के पीछे छिपी थी साजिश
जांच एजेंसी ने दावा किया है कि इस मॉड्यूल में शामिल अधिकांश सदस्य उच्च शिक्षित थे, जिनमें कई पेशेवर डॉक्टर भी शामिल थे। इन आरोपियों ने अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा और अस्पतालों/क्लीनिकों तक अपनी पहुंच का फायदा उठाकर विस्फोटक सामग्री और फंड जुटाया।
एजेंसी के अनुसार, इस मॉड्यूल की दोहरी रणनीति थी:
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पहचान छिपाना: सुरक्षा एजेंसियों को गुमराह करने के लिए इन्होंने जैश-ए-मोहम्मद के नाम का उपयोग किया।
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नेटवर्क विस्तार: इंटरनेट मीडिया के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा फैलाकर ‘लोन वुल्फ’ हमलावरों की फौज तैयार करना।
लाल किला हमला: मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी की भूमिका
10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए भीषण कार बम धमाके में एक दर्जन मासूम लोगों की जान गई थी। SIA की चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि इस हमले का मास्टरमाइंड और आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर उन नबी ही था।
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डॉ. उमर ने हमले से पहले दिल्ली में कई जगहों की रेकी की थी।
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वह धमाके के समय कार में ही मौजूद था और विस्फोट में उसकी मृत्यु हो गई थी।
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जांच में पाया गया कि वह सीधे तौर पर सीमा पार बैठे अपने आकाओं के संपर्क में था।
‘मदर ऑफ सैटर्न’ विस्फोटक का हुआ इस्तेमाल
SIA ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि यह मॉड्यूल ट्राइएसीटोन ट्राइपेरॉक्साइड (TATP) जैसे घातक विस्फोटक बनाने में माहिर था।
TATP क्या है? इसे ‘मदर ऑफ सैटर्न’ कहा जाता है क्योंकि यह बेहद अस्थिर होता है और इसे मेटल डिटेक्टर से पहचानना मुश्किल होता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आईएसआईएस (ISIS) और अल-कायदा जैसे संगठन इसका इस्तेमाल करते रहे हैं।
जाकिर मूसा की विचारधारा को जिंदा करने की कोशिश
यह मॉड्यूल जाकिर मूसा द्वारा स्थापित संगठन AGUH को दोबारा खड़ा करना चाहता था। मूसा, जो कभी बुरहान वानी का करीबी था, 2017 में हिजबुल मुजाहिदीन से अलग होकर अल-कायदा की विचारधारा से जुड़ गया था। 2019 में उसकी मौत के बाद संगठन कमजोर हो गया था, लेकिन इस ‘डॉक्टर्स मॉड्यूल’ ने इसे फिर से सक्रिय करने की कसम खाई थी।
10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
SIA ने एनआईए (NIA) अधिनियम के तहत कुल 10 लोगों को नामजद किया है:
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डॉ. उमर उन नबी (मृत), आरिफ निसार डार, यासिर-उल-अशरफ बट।
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चिकित्सक दल: डॉ. मुज़म्मिल शकील गनई, डॉ. अदील अहमद राथर और डॉ. शाहीन सईद।
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अन्य सहयोगी: मकसूद अहमद डार, इरफान अहमद वागे, ज़मीर अहमद अहंगर और तुफैल अहमद बट।
सुरक्षा एजेंसियों का अगला कदम
वर्तमान में National Investigation Agency (NIA) और SIA मिलकर इस नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों (Terror Funding) की जांच कर रही हैं। खुफिया सूत्रों का कहना है कि इस खुलासे के बाद देश के कई अन्य राज्यों में भी संदिग्धों की तलाश तेज कर दी गई है। एजेंसियों का मानना है कि इस मॉड्यूल के ध्वस्त होने से देश में एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया गया है।
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