मुंबई. देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक, रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी कार्रवाई बेहद तेज कर दी है। गुरुवार को दिल्ली स्थित मुख्यालय में रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी से करीब 8 घंटे तक तीखे सवाल-जवाब किए गए। यह पूछताछ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) द्वारा दर्ज कराई गई उस शिकायत के आधार पर हो रही है, जिसमें 19,000 करोड़ रुपये से अधिक के फंड डायवर्जन का आरोप है।
🔴 आज फिर होगी पूछताछ, बेटे अनमोल अंबानी पर भी कसा शिकंजा
CBI ने अनिल अंबानी को आज (शुक्रवार, 20 मार्च) फिर से पेश होने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि कुछ ही दिनों पहले उनके बड़े बेटे जय अनमोल अंबानी से भी एक अन्य बैंक धोखाधड़ी मामले (Reliance Home Finance) में 6 घंटे से ज्यादा पूछताछ की जा चुकी है।
💰 19,694 करोड़ का ‘मकड़जाल’: क्या हैं मुख्य आरोप?
अगस्त 2025 में दर्ज हुई FIR के मुताबिक, रिलायंस कम्युनिकेशंस ने 2013 से 2017 के बीच कई बैंकों से लोन लिया था। जांच में सामने आया है कि:
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फंड डायवर्जन: लोन की राशि का उपयोग व्यापार के बजाय समूह की अन्य कंपनियों में ‘इंटर-कॉर्पोरेट डिपॉजिट’ के जरिए किया गया।
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फर्जी देनदार (Fictitious Debtors): ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि फंड को छिपाने के लिए कागजों पर फर्जी देनदार दिखाए गए और बाद में उन्हें ‘राइट-ऑफ’ कर दिया गया।
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बैंकों का नुकसान: SBI को अकेले 2,929 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ है। अन्य बैंकों जैसे PNB, UCO बैंक और IDBI बैंक का भी हजारों करोड़ रुपया दांव पर है।
🔍 जांच की ताजा स्थिति: 2026 में दर्ज हुए नए मामले
CBI की जांच का दायरा अब केवल पुरानी शिकायतों तक सीमित नहीं है। एजेंसी ने हाल ही में बैंक ऑफ बड़ौदा (25 फरवरी 2026) और पंजाब नेशनल बैंक (5 मार्च 2026) की शिकायतों पर दो नई FIR भी दर्ज की हैं।
| मुख्य घटनाक्रम | तारीख/विवरण |
| पहली FIR दर्ज | 21 अगस्त 2025 (SBI की शिकायत पर) |
| मुंबई आवास पर छापेमारी | 23 अगस्त 2025 (‘सी विंड’ आवास और RCom दफ्तर) |
| ED की कार्रवाई | 16,310 करोड़ की संपत्ति अब तक अटैच की जा चुकी है |
| चीनी बैंकों का दबाव | चीन के तीन बड़े बैंकों का भी ₹13,558 करोड़ का बकाया उजागर |
⚖️ अनिल अंबानी का पक्ष
अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर कहा है कि, “अंबानी सभी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। मामला अभी विभिन्न न्यायिक मंचों (NCLT और सुप्रीम कोर्ट) में लंबित है और वे कानून के तहत अपना बचाव करेंगे।”
यह मामला भारतीय बैंकिंग इतिहास के सबसे जटिल ‘मनी ट्रेल’ में से एक माना जा रहा है। CBI अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस विशाल घोटाले में कुछ बड़े बैंक अधिकारियों की भी मिलीभगत थी।
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