मुंबई | बुधवार, 19 अगस्त 2026
26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए भयावह आतंकी हमले के 18 साल बाद भारत ने विदेश में छिपे मुख्य साजिशकर्ताओं को कानून के कटघरे में खड़ा करने के लिए एक अभूतपूर्व कानूनी कार्रवाई शुरू की है। भारत सरकार ने पाकिस्तान में मौजूद छह प्रमुख आरोपियों के खिलाफ ‘ट्रायल-इन-एब्सेंटिया’ (आरोपी की अनुपस्थिति में मुकदमा) की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी है।
यह ऐतिहासिक कदम नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 356 के तहत उठाया जा रहा है।
पाकिस्तान में छिपे ये 6 मुख्य आरोपी हैं निशाने पर
विशेष अदालत द्वारा जारी उद्घोषणा (Proclamation) के बावजूद अदालत के समक्ष उपस्थित न होने के कारण निम्नलिखित छह पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है:
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हाफिज मुहम्मद सईद (लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक व मुख्य साजिशकर्ता)
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जकी-उर-रहमान लखवी (लश्कर का ऑपरेशनल कमांडर)
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साजिद मीर (हमलों का मुख्य हैंडलर)
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अबू अलकामा
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आसिम उर्फ अबू काहफा
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मेजर अब्दुर रहमान पाशा
क्या है BNSS 2023 की धारा 356 और क्यों है यह महत्वपूर्ण?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 356 एक ऐसा विशेष प्रावधान है, जो भगोड़े अपराधियों को न्यायिक प्रक्रिया में अड़चन डालने से रोकता है।
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कानूनी मान्यता: यदि कोई घोषित आरोपी जानबूझकर विदेश में छिपा रहता है और भारतीय न्याय प्रणाली से बचता है, तो अदालत साक्ष्य दर्ज कर उसकी अनुपस्थिति में भी मुकदमा चला सकती है और अंतिम फैसला सुना सकती है।
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अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव: यद्यपि आरोपी पाकिस्तान में हैं, लेकिन भारतीय अदालत द्वारा दोषसिद्धि (Conviction) और सजा तय होने के बाद भारत को संयुक्त राष्ट्र (UN) और एफएटीएफ (FATF) जैसे वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान को बेनकाब करने में कानूनी मजबूती मिलेगी।
याद दिला दें: 26/11 हमले में 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों ने मुंबई में कई जगह गोलीबारी की थी, जिसमें 166 निर्दोष लोगों की जान गई थी। जिंदा पकड़े गए एकमात्र आतंकी अजमल कसाब को कानूनी प्रक्रिया के बाद फांसी दी जा चुकी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. ट्रायल-इन-एब्सेंटिया (Trial-in-Absentia) का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है आरोपी की भौतिक अनुपस्थिति में उसके खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाना और सबूतों के आधार पर फैसला सुनाना।
Q2. BNSS की किस धारा के तहत 26/11 केस में यह प्रक्रिया शुरू हुई है?
उत्तर: यह प्रक्रिया भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 356 के तहत शुरू की गई है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख उपलब्ध कानूनी प्रावधानों और सार्वजनिक समाचार स्रोतों के आधार पर विश्लेषणात्मक व सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है।
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