मुंबई. वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बीच भारतीय रुपया शुक्रवार को ताश के पत्तों की तरह ढह गया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया ₹93.71 के अब तक के सबसे निचले स्तर (All-time Low) पर बंद हुआ। यह गिरावट न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है, बल्कि आम आदमी की रसोई से लेकर विदेश यात्रा तक को महंगा करने वाली है।
आज बाजार में क्या हुआ? (Key Market Highlights)
इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया सुबह 92.92 के स्तर पर खुला था, लेकिन कारोबार के दौरान दबाव इतना बढ़ा कि यह 93.81 के इंट्रा-डे लो तक चला गया। अंत में, यह पिछले बंद के मुकाबले 82 पैसे गिरकर 93.71 पर स्थिर हुआ।
| पैमाना | ताजा आंकड़े (20 मार्च 2026) |
| रुपया (USD/INR) | ₹93.71 (रिकॉर्ड गिरावट) |
| ब्रेंट क्रूड ऑयल | $110 – $119 प्रति बैरल |
| FII निकासी (मार्च) | ₹70,990 करोड़ से अधिक |
| सेंसेक्स (Sensex) | 74,532.96 (+325.72 अंक) |
गिरावट के 3 बड़े कारण: क्यों टूट रहा है रुपया?
1. मध्य पूर्व में युद्ध की तपिश:
इजरायल और अमेरिका के बीच ईरान के साथ बढ़ते टकराव ने ऊर्जा क्षेत्र को हिला दिया है। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) के बंद होने की आशंका और ईरान के गैस क्षेत्रों पर हमलों के कारण कच्चे तेल की कीमतें $119 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, जिससे डॉलर की भारी मांग पैदा हुई है।
2. विदेशी निवेशकों (FII) का पलायन:
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय बाजार से तेजी से पैसा निकाल रहे हैं। अकेले मार्च 2026 के पहले पखवाड़े में ₹52,000 करोड़ से ज्यादा की निकासी हुई है। अनिश्चितता के माहौल में निवेशक डॉलर को सबसे सुरक्षित मान रहे हैं।
3. आयात बिल में भारी बढ़ोतरी:
तेल के साथ-साथ सोने और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का आयात महंगा होने से भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़ रहा है, जिसका सीधा दबाव घरेलू मुद्रा पर दिख रहा है।
शेयर बाजार में विरोधाभास: रुपया गिरा पर सेंसेक्स संभला
हैरानी की बात यह रही कि रुपये में इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद घरेलू शेयर बाजार में खरीदारी देखी गई। सेंसेक्स 325 अंक चढ़कर बंद हुआ, वहीं कारोबार के दौरान इसने 75,286 का स्तर भी छुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, IT और PSU बैंक शेयरों में घरेलू निवेशकों की सक्रियता ने बाजार को सहारा दिया। आईटी कंपनियों को रुपये के गिरने से फायदा होता है क्योंकि उनकी कमाई डॉलर में होती है।
आगे की राह: क्या ₹94 तक जाएगा रुपया?
बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि ईरान-अमेरिका तनाव कम नहीं हुआ, तो रुपया ₹94.20 के स्तर तक फिसल सकता है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपने विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर रुपये को संभालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
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महंगा ईंधन: प्रीमियम पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पहले ही बढ़ोतरी शुरू हो गई है।
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इलेक्ट्रॉनिक सामान: मोबाइल, लैपटॉप और टीवी की कीमतें 5-8% तक बढ़ सकती हैं।
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विदेशी शिक्षा: विदेश में पढ़ रहे भारतीय छात्रों का खर्च अचानक 4-5% बढ़ गया है।
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