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बड़ी खबर: लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक; मोदी सरकार को लगा बड़ा विधायी झटका

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नई दिल्ली | शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

शुक्रवार को विशेष सत्र के दौरान जब संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026 पर मत विभाजन (Division of Votes) हुआ, तो सदन में मौजूद 528 सदस्यों में से 298 ने पक्ष में और 230 ने विरोध में मतदान किया। संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किसी भी संशोधन के लिए कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित सदस्यों का दो-तिहाई (लगभग 352 वोट) समर्थन अनिवार्य है। आवश्यक संख्या बल न होने के कारण स्पीकर ओम बिरला ने विधेयक के गिरने की घोषणा की।

विधेयक के गिरने से क्या-क्या रुका?

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने स्पष्ट किया कि मुख्य संशोधन विधेयक के विफल होने के बाद उससे जुड़े अन्य दो महत्वपूर्ण विधायी प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में चले गए हैं:

  1. परिसीमन विधेयक, 2026: इसके जरिए 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण होना था।

  2. संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026: दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर में आरक्षण लागू करने का प्रावधान।

विपक्ष का कड़ा प्रहार: “भारत के नक्शे को बदलने की साजिश”

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा, “यह महिलाओं के सशक्तिकरण का विधेयक नहीं, बल्कि भारत के चुनावी मानचित्र को बदलने की कोशिश है। जनगणना 2026-27 अभी प्रक्रिया में है, ऐसे में 2011 के आंकड़ों पर परिसीमन थोपना दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधित्व को छीनने जैसा है।”

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि आरक्षण को परिसीमन की शर्त से जोड़ना केवल देरी करने की एक चाल है। उन्होंने मांग की कि 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को बिना किसी नई शर्त के तत्काल लागू किया जाए।

सरकार का रुख: “विपक्ष ने नारी शक्ति का अपमान किया”

वहीं, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा सांसद गिरिराज सिंह ने विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया। अमित शाह ने कहा कि परिसीमन से एससी/एसटी सीटों में भी वृद्धि होनी थी, जिसका विरोध करके विपक्ष ने पिछड़ों और महिलाओं के हक पर चोट की है। गिरिराज सिंह ने इसे “विपक्ष की नकारात्मक राजनीति” करार देते हुए कहा कि जनता चुनाव में इसका करारा जवाब देगी।

दक्षिण बनाम उत्तर की बहस हुई तेज

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन सहित दक्षिण भारतीय नेताओं ने इस विधेयक के गिरने पर राहत जताई है। उनका तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को सीटों की संख्या के आधार पर दंडित नहीं किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों की राय: 131वें संशोधन विधेयक के गिरने से अब 2029 के चुनावों में महिला आरक्षण लागू होने पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। अब सरकार को या तो विपक्ष के साथ आम सहमति बनानी होगी या फिर पुराने कानून (2023) के प्रावधानों के अनुसार जनगणना के पूरा होने का इंतजार करना होगा।

मुख्य बिंदु:

  • संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण गिर गया।

  • लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था।

  • विपक्ष ने इसे दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों के खिलाफ “अलोकतांत्रिक” कदम बताया।

  • सरकार ने मुख्य विधेयक गिरने के बाद ‘परिसीमन विधेयक’ भी वापस लिया।

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