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आजम खान और अब्दुल्ला को बड़ा झटका: दो PAN कार्ड मामले में 7 साल की सजा बरकरार, कोर्ट ने खारिज की अपील

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आजम खान और अब्दुल्ला आजम कोर्ट परिसर के बाहर (फाइल फोटो)।

रामपुर | सोमवार, 20 अप्रैल, 2026

समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रामपुर की एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट (अपर सत्र न्यायाधीश डॉ. विजय कुमार) ने सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए दोनों की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें सजा कम करने की मांग की गई थी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा 17 नवंबर 2025 को सुनाया गया फैसला कानूनी रूप से वैध है। इस आदेश के बाद अब दोनों को अपनी 7-7 साल की पूरी सजा काटनी होगी और 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी भरना होगा।

क्या था दो पैन कार्ड का विवाद?

यह मामला साल 2019 का है, जब रामपुर से भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने सिविल लाइंस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम के पास अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैन कार्ड हैं:

  1. पहला पैन कार्ड: इसमें जन्म तिथि 1 जनवरी 1993 दर्ज थी।

  2. दूसरा पैन कार्ड: इसमें जन्म तिथि 30 सितंबर 1990 दिखाई गई थी।

जांच में पाया गया कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल चुनावी लाभ और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में हेरफेर के लिए किया गया था। आजम खान पर इस साजिश में शामिल होने का आरोप सिद्ध हुआ था।

अदालत में दलीलों की जंग

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि सजा की अवधि अपराध के मुकाबले बहुत अधिक है और इसमें नरमी बरती जानी चाहिए। वहीं, अभियोजन पक्ष (सरकार) ने दलील दी कि यह सार्वजनिक दस्तावेजों के साथ गंभीर धोखाधड़ी का मामला है, इसलिए सजा में किसी भी तरह की कटौती न्यायोचित नहीं होगी।

विशेष नोट: अभियोजन पक्ष ने सजा बढ़ाने के लिए एक अलग याचिका भी दायर की है, जिस पर कोर्ट आने वाले दिनों (30 अप्रैल) में विचार कर सकता है।

आजम खान के लिए बढ़ीं चुनौतियां

नवंबर 2025 से ही जेल में बंद आजम खान के लिए यह फैसला एक बड़ा कानूनी अवरोध है। जानकारों का मानना है कि अब उनके पास इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख करने का विकल्प बचा है। हालांकि, रामपुर की अदालत के इस कड़े रुख ने उनकी तत्काल रिहाई की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

मुख्य बिंदु:

  • एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने सजा कम करने की आजम खान की याचिका को सिरे से नकारा।

  • निचली अदालत (मजिस्ट्रेट कोर्ट) द्वारा दी गई 7-7 साल की कैद और जुर्माना यथावत।

  • भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने 2019 में दर्ज कराया था जालसाजी का यह मामला।

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