कानपुर । शनिवार, 20 जून 2026
उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में महिलाओं की सुरक्षा, उत्पीड़न और विभिन्न प्रशासनिक समस्याओं के त्वरित निवारण के लिए ‘उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग’ ने कड़ा रुख अपनाया है। कानपुर सर्किट हाउस में शुक्रवार को आयोजित हुई “महिला जनसुनवाई” में कुल 15 गंभीर मामलों की संवेदनशीलता के साथ गहन सुनवाई की गई।
इस जनसुनवाई की अध्यक्षता राज्य महिला आयोग की सदस्य अनीता गुप्ता ने की। इस दौरान पुलिसिया लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को मौके पर ही सख्त कानूनी कार्रवाई करने के आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
मामला 1: बाबूपुरवा में पहचान छिपाकर युवती का मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न
जनसुनवाई के दौरान सबसे पहला और चौंकाने वाला मामला कानपुर के बाबूपुरवा क्षेत्र से आया। यहाँ की निवासी एक पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि मोबाइल के माध्यम से उसकी दोस्ती एक युवक से हुई थी।
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पहचान का फर्जीवाड़ा: युवक मूल रूप से मुस्लिम समुदाय का था, लेकिन उसने पीड़िता को धोखा देने की नीयत से अपना एक नकली हिंदू नाम बताया था। इतना ही नहीं, उसने खुद को शहर की एक बेहद नामचीन और प्रतिष्ठित मिठाई की दुकान का मालिक भी घोषित किया था।
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पोल खुलने के बाद प्रताड़ना: जब समय के साथ युवक की असली धार्मिक पहचान और दावों की पोल खुली, तो युवती ने दूरी बनानी चाही। इसके बाद से आरोपी युवक युवती को लगातार मानसिक रूप से परेशान और प्रताड़ित कर रहा है।
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पुलिस की लापरवाही पर आयोग सख्त: पीड़िता ने बताया कि बाबूपुरवा थाने में इस बाबत एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बावजूद स्थानीय पुलिस आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर रही थी। शिकायत सुनते ही आयोग की सदस्य अनीता गुप्ता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और बाबूपुरवा पुलिस को तत्काल आरोपी को चिन्हित कर सलाखों के पीछे भेजने (गिरफ्तार करने) का लिखित आदेश थमाया।
संभावित सुधार एवं कानूनी पक्ष: ऐसे मामलों में पुलिस द्वारा शुरुआती ढील देने से पीड़िता की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पहचान छिपाकर शादी का झांसा देने या प्रताड़ित करने पर बीएनएस (BNS – भारतीय न्याय संहिता) की संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।
मामला 2: चौबेपुर में फर्जी डॉक्टरों की लापरवाही से बेटी की मौत, पुलिस ने की धाराओं में हेराफेरी
जनसुनवाई में दूसरा हृदयविदारक मामला चौबेपुर के भट्ठा कोठी मौली से सामने आया, जहाँ जितेंद्र नामक एक पीड़ित पिता रोते हुए आयोग के सामने पेश हुए।
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गलत इंजेक्शन से मौत: जितेंद्र के मुताबिक, उनकी बेटी को स्थानीय एक निजी नर्सिंग होम में डॉक्टरों द्वारा गलत इंजेक्शन लगाया गया, जिसके कुछ ही समय बाद उसकी मौत हो गई।
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जातिसूचक शब्द और जान से मारने की धमकी: जब पीड़ित परिवार ने नर्सिंग होम प्रबंधन और वहां मौजूद डॉक्टरों की इस क्रूर लापरवाही का विरोध किया, तो डॉक्टरों ने उन्हें कथित तौर पर जातिसूचक शब्द कहे (SC/ST कानून का उल्लंघन) और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी।
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पुलिसिया खेल: पीड़ित पिता का आरोप है कि घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय आरोपियों को बचाने के लिए धाराओं में हेरफेर (खेल) कर दिया।
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आयोग का निर्देश: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सदस्य अनीता गुप्ता ने इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच करने और दोषी व फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ तत्काल सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश जारी किया।
सिंहपुर ग्राम पंचायत में पोषण और महिला जागरूकता चौपाल का आयोजन
सर्किट हाउस में 15 मामलों की गहन सुनवाई पूरी करने के बाद राज्य महिला आयोग की सदस्य अनीता गुप्ता ने जमीनी स्तर पर महिलाओं को जागरूक करने के लिए कानपुर के ग्रामीण अंचलों का रुख किया।
वे ग्राम पंचायत सिंहपुर पहुंचीं, जहाँ जिला कार्यक्रम अधिकारी विभाग (DPO) द्वारा ‘महिला जन-जागरूकता चौपाल’, ‘पोषण पंचायत’ और विशेष ‘स्वास्थ्य शिविर’ का आयोजन किया गया था। इस चौपाल में ग्रामीण महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों, घरेलू हिंसा से सुरक्षा के उपायों तथा बच्चों व गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
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