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आयुर्वेद, विज्ञान और योग जैसी भारतीय परंपराएँ मानव सभ्यता की सबसे प्राचीन धरोहर हैं – सुनील आंबेकर जी

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस संघ शताब्दी वर्ष

जौनपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जौनपुर “राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका” विषय पर युवा संवाद एवं युवा व्यवसायी सम्मेलन का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण की नींव युवाओं के संस्कार, अनुशासन और सतत अभ्यास में निहित है। आयुर्वेद, विज्ञान और योग जैसी भारतीय परंपराएँ मानव सभ्यता की सबसे प्राचीन धरोहर हैं, जिन्हें आज 21वीं सदी में पूरा विश्व स्वीकार कर रहा है। योग भले ही हजारों वर्ष पुराना हो, लेकिन आज विकसित देशों को भी इसकी आवश्यकता महसूस हो रही है। यह भारत की उस सांस्कृतिक चेतना का प्रमाण है, जो सदैव विश्व कल्याण की भावना से प्रेरित रही है।

उन्होंने कहा कि अच्छा नागरिक और देश के लिए उपयोगी व्यक्ति बनने की प्रक्रिया बचपन से ही प्रारंभ होती है। अचानक जागकर कोई भी महान नहीं बनता, इसके लिए निरंतर अभ्यास, अनुशासन और संस्कार आवश्यक होते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब कोई व्यक्ति अकेले सही मार्ग पर चलता है, तो वही मार्ग आगे चलकर समाज का मार्ग बन जाता है। भारत का भविष्य और विकास युवा व्यवसायियों पर निर्भर है। आज का युवा व्यवसायी भारत को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। आज के डिजिटल युग में युवा उद्यमी विकास की गंगा को पूरे विश्व में फैला रहा है।

सुनील आंबेकर जी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए पाँच आयामों पर कार्य कर रहा है – सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी भाव का जागरण तथा नागरिक कर्तव्यों का बोध।

कार्यक्रम अध्यक्ष विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि आज का युवा ऊर्जावान, तेजस्वी और नवाचार से भरा हुआ है। लेकिन युवा शक्ति को सही दिशा देने के लिए मूल्यबोध और उद्देश्य अत्यंत आवश्यक हैं। जब जीवन का लक्ष्य केवल अपने तक सीमित रहता है, तो उपलब्धियाँ भी सीमित होती हैं, जबकि लक्ष्य में “राष्ट्र” जुड़ने से जीवन स्वयं सार्थक बन जाता है।

कार्यक्रम की प्रस्तावना एवं अतिथियों का स्वागत प्रो. अविनाश पाथर्डीकर ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे, जिन्होंने प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से मुख्य वक्ता से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम में संघ की 100 वर्षों की यात्रा को दर्शाती एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे युवाओं ने उत्साहपूर्वक देखा।

साभार : विश्व संवाद केंद्र

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