नई दिल्ली: भारत की राजधानी में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ ने वैश्विक कूटनीति और तकनीक के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। शनिवार को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस शिखर सम्मेलन के ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ (New Delhi Declaration) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह समिट न केवल तकनीकी रूप से सफल रही, बल्कि इसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मानव-केंद्रित एआई’ दृष्टिकोण को वैश्विक स्तर पर स्थापित कर दिया है।
🌍 ‘सर्वजन हिताय’ के सिद्धांत पर वैश्विक एकजुटता
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि 86 देशों और दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ (सभी का कल्याण, सभी की खुशी) के भारतीय सिद्धांत को औपचारिक रूप से स्वीकार किया है।
“दुनिया ने प्रधानमंत्री मोदी के उस विजन को अपनाया है जिसमें एआई का उपयोग केवल मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि मानवता के उत्थान और संसाधनों के लोकतंत्रीकरण के लिए किया जाएगा।” – अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय मंत्री
🚀 समिट की 5 बड़ी बातें (Key Highlights)
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ऐतिहासिक निवेश की नींव: समिट के दौरान भारत ने एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 250 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता हासिल की है।
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Sovereign AI और स्वदेशी मॉडल्स: समिट में ‘Sarvam AI’ जैसे दो बड़े भारतीय भाषा मॉडल (LLM) पेश किए गए, जो पूरी तरह भारत में प्रशिक्षित हैं। यह ‘सॉवरेन एआई’ की दिशा में बड़ा कदम है।
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MANAV विजन का अनावरण: पीएम मोदी ने ‘मानव विजन’ (Human-centric, Accountable, and Noble AI) पेश किया, जो एआई के नैतिक उपयोग के लिए एक वैश्विक फ्रेमवर्क प्रदान करता है।
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टेक दिग्गजों का जमावड़ा: माइक्रोसॉफ्ट, गूगल (सुंदर पिचाई), ओपनएआई (सैम ऑल्टमैन) और एनवीडिया जैसी कंपनियों के सीईओ ने हिस्सा लिया। टाटा ग्रुप ने भारत के पहले एआई-संचालित डेटा सेंटर की योजना भी साझा की।
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ग्लोबल साउथ का नेतृत्व: यह विकासशील देशों (Global South) में आयोजित होने वाला अपनी तरह का पहला वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन था, जिसने पश्चिमी देशों के एकाधिकार को चुनौती दी है।
📊 7 ‘चक्र’ और 3 ‘सूत्र’: एआई के लिए नया रोडमैप
समिट का आयोजन ‘भारत मंडपम’ में 16 से 21 फरवरी 2026 तक किया गया। इस दौरान नीति निर्माण के लिए एक विशेष ढांचा तैयार किया गया:
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3 मुख्य सूत्र: लोग (People), ग्रह (Planet), और प्रगति (Progress)।
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7 कार्यशील चक्र (Chakras): * एआई कौशल विकास (Skilling)
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सामाजिक समावेश (Social Inclusion)
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एआई सुरक्षा (Safety)
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वैज्ञानिक अनुसंधान (Scientific Research)
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टिकाऊ कंप्यूटिंग (Sustainable Computing)
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संसाधनों का लोकतंत्रीकरण (Democratizing Access)
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आर्थिक विकास (Economic Growth)
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🛡️ एआई सुरक्षा और भविष्य की चुनौतियां
शिखर सम्मेलन में एआई के सुरक्षित इस्तेमाल पर जोर देते हुए ‘नई दिल्ली फ्रंटियर एआई कमिटमेंट्स’ को भी चर्चा में लाया गया। इसका उद्देश्य ‘डीपफेक’ और ‘मिसइंफॉर्मेशन’ जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एक साझा अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल तैयार करना है।
📝 निष्कर्ष: भारत बना एआई का विश्वगुरु?
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब तकनीक का सिर्फ उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि इसके वैश्विक नियमों का निर्माता बन गया है। 88 देशों का एक साथ आना इस बात का प्रमाण है कि दुनिया भारत के समावेशी डिजिटल ढांचे (DPI) पर भरोसा कर रही है।
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