गाजियाबाद । रविवार, 21 जून 2026
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। थाना मसूरी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वाल्मीकि मोहल्ले की एक पीड़ित मां ने अपनी 10 दिनों से अधिक समय से लापता बेटी की बरामदगी के लिए गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर (Ghaziabad Police Commissioner) का दरवाजा खटखटाया है। पीड़ित मां का आरोप है कि उनकी बेटी को कोई अज्ञात व्यक्ति नहीं, बल्कि इलाके का ही रहने वाला आवेश चौधरी नामक युवक बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है।
स्थानीय पुलिस द्वारा शुरुआती चरण में मामले को हल्के में लेने और केवल गुमशुदगी (Missing Report) दर्ज करने के कारण अब पीड़ित परिवार किसी अनहोनी की आशंका से बेहद डरा हुआ है।
दुकान से सामान लेने गई थी युवती, फिर नहीं लौटी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वाल्मीकि मोहल्ला निवासी संगीता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि उनकी बेटी बीती 11 जून 2026 को घर के पास ही स्थित एक दुकान से कुछ घरेलू सामान लेने के लिए निकली थी। जब वह काफी देर तक वापस नहीं लौटी, तो परिवार की चिंता बढ़ी। परिजनों ने अपनी तरफ से रिश्तेदारों, दोस्तों और आसपास के सभी संभावित स्थानों पर युवती की तलाश की, लेकिन उसका कहीं कोई सुराग नहीं मिल सका।
निराश होकर परिवार ने 12 जून को ही स्थानीय थाना मसूरी में इस संबंध में लिखित शिकायत दी थी।
पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल: केवल ‘गुमशुदगी’ दर्ज कर पल्ला झाड़ा
पीड़ित मां संगीता का आरोप है कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी स्थानीय मसूरी थाना पुलिस ने इस मामले में कोई प्रभावी और ठोस कदम नहीं उठाया। पुलिस ने शुरुआत में मामले की गंभीरता को समझे बिना केवल साधारण गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली।
बाद में जब परिवार को अपने सूत्रों और स्थानीय लोगों से पुख्ता जानकारी मिली कि उनकी बेटी को मसूरी इलाके का ही रहने वाला आवेश चौधरी अपने साथ बहला-फुसलाकर ले गया है, तो उन्होंने पुलिस को नामजद तहरीर भी सौंपी। आरोप है कि नामजद शिकायत मिलने के बाद भी न तो पुलिस ने आरोपी के खिलाफ उचित कानूनी धाराओं (जैसे अपहरण या बहला-फुसलाकर भगा ले जाना) के तहत कार्रवाई की और न ही युवती को बरामद करने के लिए टीमों का गठन किया।
पुलिस कमिश्नर से लगाई न्याय की गुहार
लापता हुए 10 दिन से अधिक का समय बीत जाने और स्थानीय पुलिस की शिथिलता को देखते हुए पीड़िता की मां ने वरिष्ठ अधिकारियों का रुख किया। उन्होंने गाजियाबाद पुलिस आयुक्त (कमिश्नर) से मिलकर एक शिकायत पत्र सौंपा है।
अपनी शिकायत में मां ने आशंका जताई है कि इतने दिनों से लापता होने के कारण उनकी बेटी के साथ कोई गंभीर या अनहोनी घटना घटित हो सकती है। उन्होंने पुलिस आयुक्त से मांग की है कि:
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इस पूरे मामले की स्थानीय थाने से हटाकर किसी वरिष्ठ अधिकारी की देखरेख में निष्पक्ष जांच कराई जाए।
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नामजद आरोपी आवेश चौधरी और उसके संभावित मददगारों के खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं में मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
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पुलिस की विशेष टीमों को सक्रिय कर उनकी बेटी को जल्द से जल्द और सुरक्षित बरामद किया जाए।
विशेषज्ञ दृष्टिकोण: कानून विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी लापता मामले में नामजद आरोपी का संकेत मिलता है, तो पुलिस को तुरंत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं (जैसे बहला-फुसलाकर ले जाना) के तहत मामला अपग्रेड करना चाहिए और आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगालनी चाहिए।
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