चंडीगढ़ | 22 मार्च 2026 उम्र सिर्फ एक संख्या है, और इस बात को सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री विक्रमादित्य सिंह की सास ओपिंदर कौर सेखों ने। चंडीगढ़ के सेक्टर-7 स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित 5वें खेलो मास्टर्स नेशनल गेम्स में उन्होंने अपनी रफ्तार और ताकत से सबको हैरत में डाल दिया।
ट्रैक से लेकर फील्ड तक ‘गोल्डन’ जलवा
ओपिंदर कौर ने 65+ महिला वर्ग में न केवल हिस्सा लिया, बल्कि तीन अलग-अलग स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर ‘क्लीन स्वीप’ किया। उनके प्रदर्शन के आंकड़े किसी युवा एथलीट को भी चुनौती दे सकते हैं:
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100 मीटर स्प्रिंट: मात्र 19.21 सेकंड में दौड़ पूरी कर पहला स्वर्ण जीता।
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200 मीटर दौड़: यहाँ भी उनकी फुर्ती का कोई सानी नहीं था, दूसरा गोल्ड अपने नाम किया।
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डिस्कस थ्रो (चक्का फेंक): 24.22 मीटर की शानदार दूरी तय कर तीसरा स्वर्ण पदक हासिल किया।
उपलब्धियों का ‘शतक’ पार: 150 से अधिक पदक
यह पहली बार नहीं है जब ओपिंदर कौर ने सुर्खियां बटोरी हैं। वे लंबे समय से मास्टर्स एथलेटिक्स सर्किट का एक प्रतिष्ठित चेहरा हैं।
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उनके करियर में अब तक 150 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक शामिल हैं।
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वे नियमित रूप से योगा और एथलेटिक्स अभ्यास करती हैं, जो उनकी फिटनेस का राज है।
राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा
ओपिंदर कौर की इस सफलता से हिमाचल के राजनीतिक हल्के में भी खुशी की लहर है। वे पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के पुत्र और वर्तमान कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह की सास हैं। खेल जगत के जानकारों का मानना है कि ओपिंदर कौर जैसी शख्सियतें देश में ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ की असली ब्रांड एंबेसडर हैं।
क्यों खास है यह जीत?
जहाँ लोग 60 की उम्र के बाद सक्रिय जीवन से दूरी बना लेते हैं, वहीं ओपिंदर कौर का ट्रैक पर दौड़ना समाज को एक कड़ा संदेश देता है। उनकी यह जीत दर्शाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और अनुशासन से किसी भी उम्र में देश का गौरव बढ़ाया जा सकता है।
“मैदान पर उतरते ही उम्र का अहसास खत्म हो जाता है, बस लक्ष्य दिखाई देता है।” — यह जज्बा ओपिंदर कौर को खास बनाता है।
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