इस्लामाबाद. पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। देश की आर्थिक स्थिति केवल आंकड़ों में ही नहीं, बल्कि आम नागरिक की थाली और घर की नल-बिजली में भी नजर आ रही है। पानी की भारी किल्लत, घंटों की लोड शेडिंग और आसमान छूती महंगाई ने जनता को ‘सर्वाइवल मोड’ में धकेल दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कड़े फैसले नहीं लिए गए, तो यह संकट एक बड़े मानवीय संकट (Humanitarian Crisis) का रूप ले सकता है।
💧 1. बूंद-बूंद को तरसते शहर: जल संकट बना काल
पाकिस्तान के बड़े शहरों—कराची, लाहौर और रावलपिंडी—में पानी के लिए हाहाकार मचा है।
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टैंकर माफिया का राज: कराची जैसे महानगरों में नलों में पानी न आने के कारण ‘टैंकर माफिया’ सक्रिय है। एक आम परिवार को अपनी आय का 20% से 30% हिस्सा सिर्फ पीने का पानी खरीदने में खर्च करना पड़ रहा है।
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गिरता भूजल स्तर: एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का भूजल स्तर हर साल 2 से 3 फीट नीचे जा रहा है।
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खराब प्रबंधन: इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी (IRSA) के अनुसार, जल भंडारण की कमी और पुरानी पाइपलाइनों के कारण लगभग 40% पानी लीकेज और चोरी में बर्बाद हो जाता है।
⚡ 2. बिजली संकट: 14 घंटे का अंधेरा और ‘सर्कुलर डेट’ का बोझ
पाकिस्तान का ऊर्जा क्षेत्र पूरी तरह चरमरा चुका है। देश की बिजली वितरण कंपनियां (DISCOs) भारी घाटे में हैं।
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लोड शेडिंग: ग्रामीण इलाकों में 12-14 घंटे और शहरी इलाकों में 6-8 घंटे की बिजली कटौती आम हो गई है।
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महंगे बिल: सरकार ने IMF (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) की शर्तों को पूरा करने के लिए बिजली की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है। जनता का कहना है कि “जितनी बिजली इस्तेमाल नहीं की, उससे ज्यादा टैक्स बिल में आ रहा है।”
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उद्योगों पर ताले: बिजली की कमी और ऊंची दरों के कारण कपड़ा उद्योग (Textile Industry), जो पाकिस्तान के निर्यात का मुख्य आधार है, बंद होने की कगार पर है। इससे बेरोजगारी में भारी इजाफा हुआ है।
📈 3. कमरतोड़ महंगाई: रसोई से लेकर सड़क तक आग
पाकिस्तान में महंगाई दर (Inflation Rate) दक्षिण एशिया में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक बनी हुई है।
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खाद्य असुरक्षा: आटा, चीनी, दूध और सब्जियों की कीमतें पिछले एक साल में दोगुनी हो गई हैं। मध्यम वर्गीय परिवार अब अपनी बचत खत्म कर रोजमर्रा का खर्च चला रहे हैं।
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पेट्रोल-डीजल की मार: अंतरराष्ट्रीय बाजार और डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपये (PKR) की गिरती कीमत ने ईंधन को इतना महंगा कर दिया है कि परिवहन लागत बढ़ गई है, जिससे हर चीज की कीमत में उछाल आया है।
🏭 4. अर्थव्यवस्था के सामने ‘परफेक्ट स्टॉर्म’
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह संकट पाकिस्तान के लिए एक ‘Perfect Storm’ (सब कुछ एक साथ बिगड़ना) जैसा है।
| संकट का क्षेत्र | मुख्य कारण | प्रभाव |
| कृषि | पानी की कमी | फसलों की पैदावार में कमी, निर्यात में गिरावट |
| उद्योग | महंगी बिजली | उत्पादन लागत में वृद्धि, वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा में पीछे |
| आम जनता | महंगाई | क्रय शक्ति (Purchasing Power) का खात्मा, मानसिक तनाव |
क्या है समाधान?
जानकारों के अनुसार, पाकिस्तान को अब केवल विदेशी कर्ज पर निर्भर रहने के बजाय संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान देना होगा। इसमें कर चोरी रोकना, बिजली चोरी पर लगाम लगाना और सौर ऊर्जा (Solar Energy) जैसे वैकल्पिक स्रोतों को तेजी से अपनाना शामिल है।
पाकिस्तान की जनता इस समय एक ऐसी अग्निपरीक्षा से गुजर रही है जहाँ बुनियादी सुविधाएं भी लग्जरी बनती जा रही हैं। सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक सुधारों के बीच संतुलन बनाना है।
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