तेहरान | सोमवार, 23 मार्च 2026
मुख्य बिंदु:
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ईरान ने जहाजों से 20 लाख डॉलर ($2 Million) वसूलने के दावों को नकारा।
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भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने ‘चीनी युआन’ में भुगतान की खबरों को ‘फेक’ बताया।
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ईरानी सांसद के बयान को दूतावास ने ‘व्यक्तिगत राय’ करार दिया।
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होर्मुज मार्ग से वैश्विक तेल आपूर्ति और भारतीय जहाजों की आवाजाही सामान्य।
क्या है पूरा विवाद?
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के एक हिस्से में यह दावा किया जा रहा था कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर 20 लाख डॉलर (करीब 18.8 करोड़ रुपये) का भारी ‘ट्रांजिट शुल्क’ या ‘युद्ध शुल्क’ लगा दिया है। इन खबरों ने वैश्विक बाजार में हड़कंप मचा दिया था, क्योंकि इस मार्ग से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और LNG गुजरता है।
ईरान का आधिकारिक रुख: “दावे निराधार”
भारत में ईरानी दूतावास और ईरान के विदेश मंत्रालय ने आज एक औपचारिक बयान जारी कर इन खबरों को “पूरी तरह निराधार और भ्रामक” बताया है।
ईरानी दूतावास का बयान: “ईरान द्वारा होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से किसी भी तरह की राशि वसूलने के दावे बेबुनियाद हैं। ईरान की ऐसी कोई आधिकारिक नीति नहीं है।”
दूतावास ने स्पष्ट किया कि हाल ही में ईरानी सांसद अलाएद्दीन बोरौजेर्दी द्वारा ‘युद्ध की लागत’ वसूलने को लेकर दिया गया बयान उनकी व्यक्तिगत राय हो सकती है, जिसे सरकार का आधिकारिक फैसला नहीं माना जाना चाहिए।
भारत सरकार का फैक्ट-चेक: युआन भुगतान की खबर फर्जी
इसी विवाद के बीच भारत में यह अफवाह फैली कि एक भारतीय तेल टैंकर को होर्मुज पार करने के लिए चीनी मुद्रा (Yuan) में भुगतान करना पड़ा।
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) की फैक्ट-चेक यूनिट ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
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किसी भी भारतीय जहाज द्वारा चीनी मुद्रा में भुगतान करने की खबर पूरी तरह फर्जी (Fake) है।
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भारतीय जहाजों की आवाजाही सुरक्षित है और भारत सरकार ‘ऑपरेशन संकल्प’ के माध्यम से इस क्षेत्र में अपने हितों की रक्षा कर रही है।
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मंत्रालय ने नागरिकों और मीडिया से अपील की है कि वे ऐसी संवेदनशील जानकारी साझा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि करें।
वैश्विक व्यापार पर असर और वर्तमान स्थिति
होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच एक संकरा समुद्री मार्ग है। वर्तमान में क्षेत्र में तनाव के बावजूद, ईरान ने दोहराया है कि यह मार्ग सभी देशों के लिए खुला है। हालांकि, ईरान ने यह भी संकेत दिया कि वह केवल उन जहाजों पर नजर रख रहा है जो उसकी सुरक्षा के लिए खतरा हो सकते हैं।
| विवरण | ताजा अपडेट (23 मार्च 2026) |
| ट्रांजिट शुल्क | कोई शुल्क नहीं (ईरान द्वारा खंडन) |
| भारतीय जहाजों की स्थिति | सुरक्षित और निरंतर आवाजाही जारी |
| तेल की कीमतें | अफवाहों के खंडन के बाद बाजार में स्थिरता |
निष्कर्ष
ईरान और भारत दोनों के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया है कि जहाजों से वसूली की खबरें महज एक प्रोपेगेंडा या गलतफहमी का हिस्सा थीं। फिलहाल, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए यह महत्वपूर्ण लाइफलाइन सामान्य रूप से काम कर रही है।
Matribhumisamachar


