शुक्रवार, अप्रैल 24 2026 | 05:29:53 PM
Breaking News
Home / अपराध / बुलंदशहर में 40 साल से पहचान छिपाकर रह रहा पाकिस्तानी नागरिक गिरफ्तार: सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

बुलंदशहर में 40 साल से पहचान छिपाकर रह रहा पाकिस्तानी नागरिक गिरफ्तार: सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

Follow us on:

लखनऊ । शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए बासिद इरशाद (55 वर्ष) नामक पाकिस्तानी नागरिक को गिरफ्तार किया है। आरोपी पिछले चार दशकों से भारत में अपनी पहचान बदलकर रह रहा था। पुलिस ने उसके पास से फर्जी आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बरामद किए हैं, जिनमें उसका नाम सैय्यद वासित अली दर्ज था।

गिरफ्तारी और बरामदगी

एसपी सिटी अभिषेक प्रताप अजेय के अनुसार, पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कोतवाली क्षेत्र के सुशीला विहार में एक संदिग्ध व्यक्ति रह रहा है। तलाशी के दौरान उसके पास से मिले दस्तावेजों और उसके पासपोर्ट की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। आरोपी मूल रूप से न्यू कराची, पाकिस्तान का निवासी है।

सुरक्षा चूक और 2012 का मेरठ कनेक्शन

इस मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि आरोपी 2012 में मेरठ में भी अवैध रूप से रहने के आरोप में गिरफ्तार हो चुका था।

  • बड़ा सवाल: 2012 में पकड़े जाने के बाद उसे पाकिस्तान डिपोर्ट (निर्वासित) क्यों नहीं किया गया?

  • जांच का विषय: मेरठ से छूटने के बाद वह दोबारा बुलंदशहर कैसे पहुँचा और नए सिरे से सरकारी दस्तावेज बनवाने में कैसे कामयाब रहा?

उत्तर प्रदेश अपराध जगत की खबरें – Matribhumi Samachar

क्या स्लीपर सेल से जुड़े हैं तार?

पुलिस को आशंका है कि इतने लंबे समय तक पहचान बदलकर रहना और पश्चिमी यूपी के अलग-अलग शहरों (मेरठ, बुलंदशहर, गुलावठी) में ठिकाने बदलना किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है। खुफिया विभाग (Intelligence Bureau) अब उसके मोबाइल डेटा और संपर्कों की जांच कर रहा है ताकि किसी स्लीपर सेल नेटवर्क की संभावना को तलाशा जा सके।

आरोपी का बयान

पूछताछ में बासिद ने बताया कि उसकी माँ बिलकिस फातिमा दशकों पहले पाकिस्तान से भारत आई थीं और उन्होंने बुलंदशहर के गुलावठी में दूसरी शादी कर ली थी। उसे लॉन्ग टर्म वीजा (LTV) नहीं मिल पाया, जिसके बाद उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए फर्जीवाड़े का रास्ता चुना।

इस घटना ने सिस्टम की कई खामियों को उजागर किया है, जिन पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है:

  1. डेटाबेस लिंकेज: एक बार गिरफ्तार होने वाले विदेशी नागरिकों का बायोमेट्रिक डेटा सभी जिलों की पुलिस के साथ साझा होना चाहिए ताकि वे दोबारा पहचान न बदल सकें।

  2. आधार सत्यापन: आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसियों को एलटीयू (LTV) धारक विदेशियों के लिए विशेष सत्यापन प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

  3. स्थानीय सत्यापन: किराएदारों के पुलिस वेरिफिकेशन को और अधिक सख्त बनाने की आवश्यकता है।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

अयोध्या में बनेगा देश का पहला मंदिर संग्रहालय: टाटा ग्रुप की 600 करोड़ की सौगात

लखनऊ । गुरुवार, 23 अप्रैल, 2025 अयोध्या की पावन धरती अब केवल राम मंदिर के …