कोलकाता । रविवार, 24 मई 2026
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अभेद्य किला माने जाने वाले डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली फालता विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभूतपूर्व और ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। 21 मई को हुए दोबारा मतदान (Repolling) के बाद रविवार, 24 मई को हुई मतगणना में भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को भारी अंतर से शिकस्त दी है।
चुनाव आयोग (ECI) के आधिकारिक आंकड़े
शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में जीत के अंतर और उम्मीदवारों के क्रम को लेकर कुछ अस्पष्टता थी। चुनाव आयोग (ECI) द्वारा सभी 22 राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद जारी किए गए सटीक आंकड़े इस प्रकार हैं:
| उम्मीदवार का नाम | पार्टी | प्राप्त कुल वोट | स्थिति/अंतर |
| देबांग्शु पांडा | भाजपा (BJP) | 1,49,666 | विजेता (1,09,021 वोटों से जीत) |
| शंभूनाथ कुर्मी | भाकपा (मार्क्सवादी) | 40,645 | दूसरे स्थान पर रहे |
| अब्दुर रज्जाक मोल्ला | कांग्रेस (INC) | 10,084 | तीसरे स्थान पर रहे (जमानत जब्त) |
| जहांगीर खान | तृणमूल कांग्रेस (TMC) | 7,783 | चौथे स्थान पर खिसके (जमानत जब्त) |
महत्वपूर्ण तथ्य : कुछ शुरुआती खबरों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान को सीधे चौथे स्थान पर दिखाए जाने के साथ तीसरे स्थान के उम्मीदवार का जिक्र नहीं था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला 10,084 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे, जबकि मैदान से पीछे हटने वाले टीएमसी के जहांगीर खान 7,783 वोटों के साथ चौथे नंबर पर रहे। टीएमसी के इतिहास में यह पहली बार है जब उसका कोई उम्मीदवार चौथे पायदान पर खिसका है और उसकी जमानत जब्त हुई है।
74 साल के इतिहास में पहली बार भगवा परचम
फालता विधानसभा सीट का इतिहास 1952 से शुरू होता है। तब से लेकर 2006 तक यह सीट पारंपरिक रूप से कांग्रेस और CPI(M) का गढ़ रही थी। साल 2011 में जब बंगाल में परिवर्तन हुआ, तब से लगातार तीन बार यहाँ तृणमूल कांग्रेस (TMC) जीतती आ रही थी। यह क्षेत्र टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी को भारी बढ़त मिली थी। ऐसे में भाजपा की यह जीत बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है।
इस जीत के साथ ही 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा की कुल सीटों की संख्या बढ़कर 208 हो गई है, जबकि सत्तारूढ़ टीएमसी के पास अब 80 सीटें बची हैं।
क्यों कराना पड़ा था दोबारा मतदान (Repolling)?
बता दें कि इस सीट पर पहले 29 अप्रैल को मतदान हुआ था, लेकिन उस दौरान व्यापक स्तर पर गड़बड़ी, ईवीएम (EVM) मशीनों पर भाजपा के चुनाव चिह्न पर टेप चिपकाने और मतदान केंद्रों पर लगे वेब कैमरों के फुटेज के साथ छेड़छाड़ की शिकायतें सामने आई थीं। तत्कालीन ऑब्जर्वर सुब्रत गुप्ता की जांच में कम से कम 60 बूथों पर पुख्ता सबूत मिलने के बाद चुनाव आयोग ने यहाँ का मतदान रद्द कर दिया था।
इसके बाद 21 मई को कड़े सुरक्षा घेरे में सभी 285 बूथों पर दोबारा मतदान कराया गया। भारी सुरक्षा के चलते जनता में भरोसा बढ़ा और रीपोलिंग में मतदान का प्रतिशत करीब 2% बढ़कर 88.13% तक पहुंच गया, जिसने भाजपा के पक्ष में एकतरफा माहौल बनाने का काम किया।
दक्षिण 24 परगना जिले में भाजपा की मजबूत धमक
साउथ 24 परगना जिला, जिसमें कुल 31 विधानसभा सीटें आती हैं और जिसे टीएमसी का सबसे मजबूत आधार माना जाता था, वहाँ भाजपा ने फालता को मिलाकर अब 11 सीटों पर कब्जा कर लिया है। भाजपा ने न सिर्फ फालता, बल्कि सागर, काकद्वीप, गोसाबा, सोनारपुर के साथ-साथ जादवपुर, टॉलीगंज, बेहला पूर्व और बेहला पश्चिम जैसे शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में भी पहली बार ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। हालांकि, टीएमसी बासंती, कुलतली, रायदीघी और बजबज जैसी सीटों पर अपनी साख बचाने में कामयाब रही है।
नतीजों के बाद जहां पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय बलों और काउंटिंग में धांधली के आरोप लगाए हैं, वहीं वर्तमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इसे ‘जनता के विश्वास और लोकतंत्र की जीत’ करार दिया है।
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