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शरिया निवेश की आड़ में ₹3,000 करोड़ का महाघोटाला: हीरा ग्रुप की मास्टरमाइंड नौहेरा शेख गुरुग्राम से गिरफ्तार

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पोंजी स्कीम का शिकार हुए निवेशकों की जमा-पूंजी और हीरा गोल्ड इन्वेस्टमेंट फ्रॉड का प्रतीकात्मक ग्राफिक्स

नई दिल्ली । सोमवार, 25 मई 2026

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने देश के सबसे चौंकाने वाले वित्तीय घोटालों में से एक—’हीरा ग्रुप निवेश घोटाले’ की मुख्य सूत्रधार नौहेरा शेख (Nowhera Shaik) को हरियाणा के गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, नौहेरा शेख अपनी असली पहचान छिपाकर और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर गुरुग्राम के सेक्टर-45 स्थित एक एयरबीएनबी (Airbnb) प्रॉपर्टी में छिपी हुई थी।

फर्जी आधार कार्ड और बदली पहचान का खुलासा

जांच में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि गिरफ्तारी के वक्त नौहेरा शेख अपने एक सहयोगी समीर खान के साथ ‘शेख कमर जहां’ (Shaik Khamar Jahan) नाम के फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा उसकी जमानत याचिका खारिज होने और गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी होने के बाद से वह लगातार फरार चल रही थी। ईडी की खुफिया विंग और हरियाणा पुलिस के एक संयुक्त ऑपरेशन में उसे सफलतापूर्वक दबोच लिया गया, जिसके बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर हैदराबाद की विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत में पेश किया गया।

घोटाले का तरीका: आस्था की आड़ में 36% मुनाफे का चक्रव्यूह

इस पूरे घोटाले का सबसे दर्दनाक पहलू यह था कि इसके शिकार मुख्य रूप से वे सीधे-सादे मुस्लिम निवेशक बने जो शरिया कानून (Sharia Law) के तहत ‘ब्याज’ (Interest) कमाने को वर्जित मानते हैं।

नौहेरा शेख और उसके सहयोगियों (मौली थॉमस और बीजू थॉमस) ने इस धार्मिक आस्था का फायदा उठाया। उन्होंने लोगों से वादा किया कि उनका पैसा ‘हलाल व्यापार’ और सोने के कारोबार (Heera Gold) में लगाया जाएगा, जिस पर सालाना 36 प्रतिशत तक का शुद्ध मुनाफा (Profit) दिया जाएगा। शुरुआती निवेशकों को विश्वास जीतने के लिए मोटा रिटर्न दिया गया, जो कि एक क्लासिक ‘पोंजी स्कीम’ (Ponzi Scheme) का तरीका है। लेकिन बाद में, देश भर के 1,72,114 से अधिक निवेशकों की गाढ़ी कमाई पूरी तरह डूब गई।

महत्वपूर्ण तथ्य

शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स और दावों के मुकाबले आधिकारिक जांच में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट हुए हैं, जिनका सुधारे जाना जरूरी है:

  1. घोटाले की सटीक राशि: शुरुआती दावों में इस घोटाले को ₹6,000 करोड़ से ऊपर का बताया जा रहा था, लेकिन ईडी (ED) की आधिकारिक चार्जशीट और जांच के अनुसार, देश भर के निवेशकों से धोखाधड़ी की यह प्रमाणित राशि वर्तमान में ₹3,000 करोड़ से अधिक आंकी गई है।

  2. सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने का झूठ पकड़ा गया: नौहेरा शेख ने अदालत में हलफनामा देकर दावा किया था कि उसने जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण (Surrender) करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने उसे कस्टडी में लेने से मना कर दिया। सुप्रीम कोर्ट और विशेष पीएमएलए कोर्ट की जांच में यह दावा पूरी तरह झूठा पाया गया, जिसके बाद 7 मई 2026 को अदालत ने उसका बेल ऑर्डर रद्द कर गैर-जमानती वारंट जारी किया था।

  3. संपत्तियों की नीलामी में बाधा: ईडी ने पूर्व में इसकी ₹400 करोड़ से अधिक की संपत्तियां कुर्क की थीं, जिनमें से ₹122 करोड़ मूल्य की संपत्तियों की नीलामी की जा चुकी है। हालांकि, नौहेरा ने खरीदारों के पक्ष में सेल डीड (रजिस्ट्री) निष्पादित करने में सहयोग नहीं किया और अदालती प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश की।

अदालत को प्रभावित करने के लिए पीएमओ (PMO) अधिकारी का फर्जी रूप

इस हाई-प्रोफाइल मामले में जालसाजी की हदें तब पार हो गईं, जब इसी साल जनवरी में कल्याण बनर्जी नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। उसने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का वरिष्ठ अधिकारी और वकील बताकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी संपत्तियों की नीलामी और पीड़ितों को मुआवजा देने की प्रक्रिया को रुकवाने का प्रयास किया था। जांच में पाया गया कि वह नौहेरा शेख के इशारे पर ही काम कर रहा था।

वर्ष 2024 में की गई छापेमारी के दौरान ईडी ने नौहेरा के ठिकानों से ₹92 लाख की नकदी और 12 महंगी लग्जरी कारें (जिसमें BMW, मर्सिडीज-बेंज और टोयोटा फॉर्च्यूनर शामिल हैं) जब्त की थीं। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के तहत कुर्क की गई संपत्तियों को बेचकर 1.7 लाख से अधिक पीड़ित निवेशकों को उनका पैसा वापस दिलाने की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

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