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UN CERD की रिपोर्ट पर भारत का कड़ा प्रतिवाद: विदेश मंत्रालय ने बताया ‘राजनीति से प्रेरित’

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नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय का मुख्य द्वार और भारतीय तिरंगा ध्वज, जो अंतरराष्ट्रीय मामलों पर भारत के आधिकारिक रुख का प्रतिनिधित्व करता है।
नई दिल्ली । बुधवार, 26 अगस्त 2026
संयुक्त राष्ट्र की नस्लीय भेदभाव उन्मूलन समिति (Committee on the Elimination of Racial Discrimination – CERD) द्वारा भारत की 11वीं आवधिक समीक्षा (Periodic Review) के बाद जारी टिप्पणियों पर भारत सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने समिति की रिपोर्ट में भारत से जुड़े संदर्भों को खारिज करते हुए इन्हें “राजनीति से प्रेरित” और “बेहद दुर्भावनापूर्ण” करार दिया है।

CERD की रिपोर्ट और प्रमुख चिंताएं

संयुक्त राष्ट्र की समिति ने भारत में मानवाधिकारों, कानून-प्रवर्तन और संवैधानिक सुरक्षा उपायों से संबंधित कई मुद्दों पर समीक्षा की थी। समिति ने अपनी टिप्पणियों में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चिंताएं जताई थीं:
  • अल्पसंख्यक एवं वंचित वर्ग: अनुसूचित जातियों (SC), आदिवासी समुदायों, धार्मिक-जातीय अल्पसंख्यकों और गैर-नागरिकों (जैसे शरण चाहने वाले) के प्रति पुलिस व सुरक्षा बलों द्वारा किए जाने वाले व्यवहार पर सवाल उठाए।
  • जांच और जवाबदेही: कथित हिंसा, अत्यधिक बल प्रयोग, यातना और हिरासत से जुड़ी शिकायतों की पारदर्शी व निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।
  • प्रवासी व शरणार्थी मुद्दे: रोहिंग्या और बंगाली भाषी मुस्लिम प्रवासियों से संबंधित कानून-प्रवर्तन कार्रवाइयों को लेकर समिति ने टिप्पणी की।

विदेश मंत्रालय (MEA) और भारत का पक्ष

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत ने हमेशा से अंतरराष्ट्रीय मंचों और संयुक्त राष्ट्र की प्रक्रियाओं में रचनात्मक भावना के साथ भाग लिया है।
  • संवैधानिक सुरक्षा और बहुलतावाद: जिनेवा में समीक्षा के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने देश के मजबूत कानूनी ढांचे, स्वतंत्र न्यायपालिका, संवैधानिक गारंटियों और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के लिए उठाए गए ठोस कदमों को सामने रखा था।
  • अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन: भारत ने स्पष्ट किया कि समिति अपनी निर्धारित सीमाओं और कन्वेंशन के अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अप्रमाणित आरोपों तथा व्यापक सामान्यीकरण वाली टिप्पणियों का सहारा ले रही है।
  • औपचारिक जवाब: विदेश मंत्रालय ने रेखांकित किया कि भारत निर्धारित अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया के तहत समिति की इन टिप्पणियों का औपचारिक और तथ्यात्मक उत्तर दाखिल करेगा।
नस्लीय भेदभाव के खिलाफ भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता ऐतिहासिक रही है और भारत खुद इस वैश्विक कन्वेंशन की निर्माण प्रक्रिया में एक प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: CERD क्या है?
उत्तर: CERD (Committee on the Elimination of Racial Discrimination) संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष संस्था है, जो सदस्य देशों में नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन और मानवाधिकारों की समीक्षा करती है।
प्रश्न 2: भारत ने संयुक्त राष्ट्र समिति की रिपोर्ट को क्यों खारिज किया?
उत्तर: भारत के अनुसार समिति की टिप्पणियां तथ्यात्मक रूप से अप्रमाणित, पक्षपातपूर्ण, राजनीतिक रूप से प्रेरित और उसके निर्धारित अधिकार क्षेत्र से बाहर थीं।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयानों और प्रस्तुत प्रेस वार्ता के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को अंतरराष्ट्रीय मामलों पर तथ्यात्मक जानकारी प्रदान करना है।
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