नई दिल्ली. भारत सरकार ने देश की आर्थिक सेहत मापने के पैमाने में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए नेशनल अकाउंट्स सीरीज़ में संशोधन किया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025–26 के लिए देश की जीडीपी (GDP) वृद्धि दर का अनुमान 7.1% से बढ़ाकर 7.6% कर दिया गया है।
आधार वर्ष में बदलाव: 2011-12 की जगह अब 2022-23
अर्थव्यवस्था की गणना को अधिक सटीक और आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने आधार वर्ष (Base Year) को 2011–12 से बदलकर 2022–23 कर दिया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य नई आर्थिक संरचना, डिजिटल इकोनॉमी और उभरते क्षेत्रों को जीडीपी के दायरे में लाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 11 साल पुराने आधार वर्ष को बदलने से आंकड़ों में वास्तविकता और पारदर्शिता बढ़ेगी।
तीसरी तिमाही (Q3) के शानदार नतीजे
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष (2025–26) की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में देश की अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से बढ़ी है।
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रियल जीडीपी: नई सीरीज के आधार पर इस तिमाही में रियल जीडीपी ₹84.54 लाख करोड़ दर्ज की गई।
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तुलना: पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा ₹78.41 लाख करोड़ था।
पिछली तिमाहियों के आंकड़ों में भी संशोधन
नई गणना पद्धति के लागू होने से पहली दो तिमाहियों के विकास दर के आंकड़ों को भी अपडेट किया गया है:
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Q1 (अप्रैल-जून): पहले के 6.7% से बढ़कर अब 7.9%।
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Q2 (जुलाई-सितंबर): संशोधित आंकड़ों के अनुसार अब 8.1% आंकी गई है।
तकनीकी सुधार: ‘डबल डिफ्लेशन’ का इस्तेमाल
इस नई जीडीपी सीरीज़ में पहली बार ‘डबल डिफ्लेशन’ और एक्सट्रापोलेशन जैसी आधुनिक सांख्यिकीय तकनीकों का व्यापक उपयोग किया गया है। यह तकनीक इनपुट और आउटपुट कीमतों के अंतर को बारीकी से मापती है, जिससे विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का अधिक सटीक आकलन संभव हो पाता है।
स्थिर आर्थिक संकेत
सरकार का कहना है कि ये संशोधित आंकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था न केवल स्थिर है, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूती से आगे बढ़ रही है। इन आंकड़ों से आने वाले समय में नीतिगत निर्णय लेने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने में बड़ी मदद मिलेगी।
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