लखनऊ | शुक्रवार, 27 मार्च 2026
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने निराश्रित गोवंश के संरक्षण और उनकी देखभाल को लेकर एक बड़ी डिजिटल क्रांति की शुरुआत की है। प्रदेश भर में संचालित 5446 गो-आश्रय स्थलों को अब सीधे सीसीटीवी (CCTV) निगरानी तंत्र से जोड़ दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य गौशालाओं में होने वाली किसी भी प्रकार की लापरवाही को शून्य करना और प्रशासनिक जवाबदेही को जमीनी स्तर पर मजबूत करना है।
7500 से अधिक कैमरों का ‘डिजिटल पहरा’
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक इन आश्रय स्थलों पर 7592 कैमरे लगाए जा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक गो-आश्रय स्थल पर कम से कम पाँच कैमरे लगाना है, ताकि परिसर के हर कोने, विशेषकर चारा गोदाम, पेयजल क्षेत्र और चिकित्सा कक्ष पर नजर रखी जा सके। इस हाई-टेक निगरानी से अब अधिकारी लखनऊ में बैठे-बैठे भी किसी भी जनपद की गौशाला की वास्तविक स्थिति देख सकेंगे।
कमांड कंट्रोल रूम से होगी ‘सर्जिकल’ मॉनिटरिंग
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने बताया कि इस डिजिटल प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ी है।
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सक्रिय जिले: वर्तमान में 56 जनपदों में अत्याधुनिक कमांड एवं कंट्रोल रूम पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं।
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आगामी योजना: शेष 19 जनपदों में भी जल्द ही CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड के माध्यम से इन कंट्रोल रूम्स की स्थापना की जाएगी।
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त्वरित कार्रवाई: यदि किसी केंद्र पर पशुओं के चारे, सफाई या स्वास्थ्य सेवाओं में कमी पाई जाती है, तो कंट्रोल रूम से तुरंत संबंधित अधिकारियों को अलर्ट भेजा जाता है।
इन तीन मानकों पर विशेष जोर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सीसीटीवी निगरानी का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि:
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पोषक आहार: क्या गोवंश को निर्धारित समय पर पर्याप्त हरा चारा और भूसा मिल रहा है?
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स्वच्छता: क्या पेयजल के स्रोत साफ हैं और परिसर में गोबर व गंदगी का निस्तारण नियमित हो रहा है?
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मेडिकल केयर: बीमार पशुओं को समय पर चिकित्सा सहायता और दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं या नहीं?
जवाबदेही और सख्त निर्देश
राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और पशुपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे नियमित रूप से इन कैमरों की फीड चेक करें। यदि कोई कैमरा खराब पाया जाता है, तो उसे तत्काल प्रभाव से ठीक कराना अनिवार्य होगा। साथ ही, अधिकारियों को महीने में कम से कम एक बार भौतिक निरीक्षण (Physical Inspection) करने के भी आदेश दिए गए हैं ताकि तकनीक और धरातल का सामंजस्य बना रहे।
विशेषज्ञ की राय: “यह कदम न केवल गोवंश की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि भ्रष्टाचार और संसाधनों की बर्बादी पर भी लगाम लगाएगा। यह उत्तर प्रदेश को पशु संरक्षण के क्षेत्र में ‘डिजिटल गवर्नेंस’ का मॉडल बना रहा है।”
मुख्य बिंदु:
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प्रदेश के 5446 गो-आश्रय स्थलों को डिजिटल कवच से लैस किया गया।
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अब तक 7592 हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे स्थापित, हर केंद्र पर 5 कैमरों का लक्ष्य।
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56 जिलों में कमांड एंड कंट्रोल रूम सक्रिय; शेष 19 में CSR फंड से जल्द होगी स्थापना।
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अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाने के दिए निर्देश।
Matribhumisamachar


