मथुरा | बुधवार, 27 मई 2026
वृंदावन के सुप्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की व्यवस्थाओं और रखरखाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पिछले साल (अगस्त 2025) गठित उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति (High-Powered Committee) में बड़ा फेरबदल करते हुए गोस्वामी समाज के चार नए प्रतिनिधियों को शामिल करने का निर्देश दिया है।
प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह फैसला गोस्वामी समाज की उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें मंदिर के पारंपरिक समय और पूजा पद्धतियों में बदलाव का विरोध किया गया था।
🔄 प्रबंधन समिति में क्या हुआ बदलाव?
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पहले मनमाने तरीके से चुने गए सदस्यों के विरोध के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने दोनों प्रमुख सेवा समूहों से 2-2 सदस्यों को समिति के समक्ष सुझाव देने के लिए अधिकृत किया है:
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शयन भोग समूह (Shayan Bhog Group): इस समूह से रजत गोस्वामी और शैलेंद्र गोस्वामी को नामित किया गया है।
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राजभोग समूह (Raj Bhog Group): इस समूह से गोपेश गोस्वामी और हिंमाशु गोस्वामी को समिति का हिस्सा बनाया गया है।
नोट: यह नए सदस्य मुख्य प्रबंधन समिति के साथ मिलकर मंदिर की सेवा परंपरा, आरती-भोग के समय और दैनिक प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सुझाव साझा करेंगे, जिन पर मुख्य समिति गंभीरता से विचार करेगी।
🏛️ पारंपरिक रीति-रिवाजों की बहाली और VIP कल्चर का अंत
सुनवाई के दौरान गोस्वामी समाज के वकीलों ने दलील दी कि प्रशासनिक सुविधा के नाम पर ठाकुरजी के जागने, भोग और आरती के पारंपरिक समय में बदलाव किया गया था, जो सदियों पुरानी परंपरा के खिलाफ है। इसके अलावा गर्भगृह में लगाई गई तेज हैलोजन लाइटों पर भी आपत्ति जताई गई।
सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए निम्नलिखित मुख्य निर्देश दिए:
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परंपराओं का सम्मान: मंदिर के कपाट खुलने-बंद होने के समय और पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं को यथासंभव दोबारा बहाल किया जाए।
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शोषण और VIP संस्कृति पर रोक: कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि परंपराएं बहाल हों, लेकिन भक्तों का किसी भी प्रकार का आर्थिक शोषण या दान के नाम पर गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। साथ ही मंदिर में कोई ‘विशिष्ट वर्ग’ (VIP Culture) नहीं होना चाहिए।
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लाइटिंग में बदलाव: भगवान को सजीव रूप मानने की जनभावना का आदर करते हुए गर्भगृह की अत्यधिक चमकीली लाइटों को व्यवस्थित करने की बात कही गई।
🗺️ यूपी सरकार बनाएगी ‘मास्टर प्लान’: संकरी गलियों से मिलेगा छुटकारा
सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर की ओर जाने वाली बेहद संकरी और तंग गलियों (कुंज गलियों) में बढ़ती भीड़ पर गहरी चिंता जताई। जस्टिस जोयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि तिरुपति जैसे बड़े मंदिरों के पास जगह का फायदा है, जबकि बांके बिहारी मंदिर का परिसर छोटा है और रास्ते बेहद संकरे हैं, जहाँ 200 लोग भी जमा हो जाएं तो रास्ता चोक हो जाता है।
इसके लिए कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक व्यापक डेवलपमेंट प्लान (Master Plan) तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसके तहत:
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मंदिर की ओर जाने वाली सड़कों का चौड़ीकरण (Road Widening) किया जाएगा।
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रास्तों पर होने वाले अवैध व्यावसायिक अतिक्रमण को नियंत्रित किया जाएगा।
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श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, विश्राम गृह (Dharamshala), अस्पताल, आपातकालीन निकास (Emergency Exits) और बुजुर्गों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की व्यवस्था की जाएगी।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि क्षेत्र के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अब तक 14 सेल डीड (बैनामा) निष्पादित किए जा चुके हैं।
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