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धार्मिक पहचान से आगे निकली ‘पवित्र तुलसी’, बांग्लादेश बना भारतीय तुलसी का सबसे बड़ा खरीदार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली । बुधवार, 27 मई 2026

भारत के पारंपरिक आंगन की शोभा और हिंदू संस्कृति में पूजनीय माना जाने वाला तुलसी का पौधा (Holy Basil) अब केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रह गया है। साल 2026 के वैश्विक व्यापारिक आंकड़ों ने एक बेहद दिलचस्प और सकारात्मक बदलाव दिखाया है। मुस्लिम बहुल देश बांग्लादेश अब भारत से सबसे ज्यादा तुलसी आयात (खरीद) करने वाला दुनिया का शीर्ष देश बन गया है।

वैश्विक वेलनेस और हर्बल इंडस्ट्री में आए इस बड़े उछाल के कारण, तुलसी अब एक ‘धार्मिक प्रतीक’ के दायरे से बाहर निकलकर ‘वैश्विक हर्बल सुपरफूड’ के रूप में स्थापित हो चुकी है।

बांग्लादेश में क्यों बढ़ा तुलसी का क्रेज?

अंतरराष्ट्रीय व्यापार और फार्मास्युटिकल सेक्टर से जुड़े हालिया आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश की दवा कंपनियां, खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) उद्योग और हर्बल विनिर्माण इकाइयां बड़े पैमाने पर भारत से तुलसी की सूखी पत्तियां, अर्क (Extract) और पाउडर मंगा रही हैं।

इसके पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण काम कर रहे हैं:

  1. हर्बल चाय और पारंपरिक उपचार की ओर झुकाव: बांग्लादेश की एक बड़ी आबादी आज भी पारंपरिक और प्राकृतिक उपचार प्रणालियों पर गहरा भरोसा करती है। वहां ‘तुलसी टी’ (Tulsi Tea) का चलन लाइफस्टाइल का हिस्सा बनता जा रहा है।

  2. महामारी के बाद बदला नजरिया: कोविड-19 के बाद से दुनिया भर की तरह बांग्लादेश में भी लोग अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को लेकर बेहद जागरूक हुए हैं, जिसके चलते प्राकृतिक उत्पादों की मांग बढ़ी है।

तुलसी के औषधीय गुण: क्या कहती है आधुनिक चिकित्सा?

आयुर्वेद में तुलसी को ‘जड़ी-बूटियों की रानी’ कहा गया है। आधुनिक वैज्ञानिक शोधों (संशोधनों) ने भी इसके इन औषधीय गुणों की पुष्टि की है:

  • एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी: यह शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाती है और अंदरूनी सूजन को कम करती है।

  • श्वसन तंत्र (Respiratory System) के लिए वरदान: सर्दी-जुकाम, पुरानी खांसी, ब्रोंकाइटिस और अस्थमा जैसी सांस की समस्याओं में तुलसी का अर्क जादुई असर दिखाता है। यही कारण है कि बांग्लादेश की बड़ी फार्मा कंपनियां इसका इस्तेमाल कफ सिरप में कर रही हैं।

  • एडाप्टोजेन (Adaptogen) गुण: तुलसी एक बेहतरीन एडाप्टोजेन है, जिसका मतलब है कि यह शरीर को मानसिक और शारीरिक तनाव (Stress) से लड़ने में मदद करती है।

विभिन्न रूपों में भारत से निर्यात

भौगोलिक निकटता (Geographical Proximity) और भारत-बांग्लादेश के बीच सुलभ व्यापारिक समझौतों के कारण परिवहन लागत बेहद कम आती है। भारत से तुलसी को मुख्य रूप से इन रूपों में भेजा जाता है:

  • सूखी तुलसी की पत्तियां और बारीक पाउडर

  • प्रीमियम हर्बल टी बैग्स

  • तुलसी ऑयल और लिक्विड कंसंट्रेट

इस बढ़ते निर्यात से न केवल भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हो रहा है, बल्कि भारत के छोटे और मध्यम स्तर के औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों की आय में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

पाकिस्तान, मलेशिया और यूएई (UAE) में भी हलाल हर्बल मार्केट का विस्तार

यह ट्रेंड सिर्फ बांग्लादेश तक ही सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ‘हलाल सर्टिफाइड हर्बल और आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स’ का बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इंडोनेशिया, मलेशिया, पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों में भी भारत के ऑर्गेनिक वेलनेस उत्पादों की मांग में भारी उछाल आया है। प्रकृति का दिया यह अनमोल उपहार अब बिना किसी भौगोलिक या धार्मिक भेदभाव के पूरी मानवता को स्वस्थ रखने में अपना योगदान दे रहा है।

संबंधित संदर्भ और कड़ियाँ (Relevant Links)

तुलसी के पारंपरिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व तथा भारत के समृद्ध वेलनेस इकोसिस्टम के बारे में अधिक जानने के लिए आप इन कड़ियों पर जा सकते हैं:

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।