तिरुवनंतपुरम । शनिवार, 27 जून 2026
केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला अयप्पा मंदिर (Sabarimala Temple) में कथित तौर पर सोना गायब होने के मामले में विशेष जांच टीम (SIT) की कार्रवाई अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच गई है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही एसआईटी ने शुक्रवार को मुख्य आरोपी और बिजनेसमैन उन्नीकृष्णन पोट्टी (Unnikrishnan Potti) से पुलिस मुख्यालय में आठ घंटे से अधिक समय तक कड़ी पूछताछ की।
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, एसआईटी अगले सप्ताह केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) में अपनी अंतिम रिपोर्ट या आरोपपत्र (Chargsheet) दाखिल करने की तैयारी कर रही है। इसी बीच, केरल हाईकोर्ट ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए कोट्टायम स्थित ऐतिहासिक एट्टुमानूर महादेव मंदिर (Ettumanoor Mahadeva Temple) की प्रसिद्ध ‘एझारापोनाना’ (साढ़े सात स्वर्ण हाथी) प्रतिमाओं में इस्तेमाल किए गए सोने की गुणवत्ता और मौलिकता की स्वतंत्र जांच के आदेश भी दे दिए हैं।
सबरीमाला मंदिर में सोना गायब होने का पूरा मामला क्या है?
यह विवाद मुख्य रूप से सबरीमाला मंदिर के श्रीकोविल (गर्भगृह) के स्वर्णमंडित चौखटों और द्वारपालक प्रतिमाओं (Dwarapalaka Idols) पर चढ़ाई गई सोने की परत से जुड़ा है।
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2019 का स्वर्ण परत कार्य: वर्ष 2019 में मंदिर की इन सोने से मढ़ी वस्तुओं को दोबारा स्वर्ण परत (Electroplating) चढ़ाने और मरम्मत के लिए चेन्नई की एक निजी कंपनी ‘स्मार्ट क्रिएशन्स’ के पास भेजा गया था।
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लाखों के सोने की हेराफेरी का संदेह: इस पूरी प्रक्रिया को बेंगलुरु आधारित व्यवसायी उन्नीकृष्णन पोट्टी ने प्रायोजित (Sponsor) किया था। सतर्कता जांच (Devaswom Vigilance) में यह सामने आया कि जब यह सामग्रियां मरम्मत के लिए भेजी गई थीं, तब उनका वजन लगभग 42.8 किलोग्राम था, लेकिन वापसी के समय उसमें करीब 4.5 किलोग्राम सोने की कमी पाई गई। एसआईटी को अंदेशा है कि केमिकल प्रोसेसिंग के जरिए इस सोने को गायब किया गया।
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मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी: इस मामले में पोट्टी को मुख्य आरोपी बनाया गया था और पिछले साल अक्टूबर में लंबी पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। वह लगभग तीन महीने से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहे, जिसके बाद उन्हें वैधानिक जमानत (Statutory Bail) मिली।
एसआईटी पहले ही अदालत को सूचित कर चुकी है कि इस मामले से जुड़े दोनों एफआईआर (FIR) की जांच पूरी हो चुकी है और अब अंतिम रिपोर्ट सौंपने का समय आ गया है।
एट्टुमानूर महादेव मंदिर को लेकर केरल हाईकोर्ट का ताजा आदेश
सबरीमाला विवाद के बीच, केरल हाईकोर्ट ने कोट्टायम के प्रसिद्ध एट्टुमानूर महादेव मंदिर की बहुमूल्य ‘एझारापोनाना’ (Ezharaponnana) प्रतिमाओं की जांच के कड़े निर्देश दिए हैं।
‘एझारापोनाना’ क्या है और क्या हैं आरोप?
‘एझारापोनाना’ का अर्थ है साढ़े सात हाथी। इसमें सात बड़े और एक छोटा स्वर्ण हाथी शामिल हैं, जिन्हें अत्यधिक पवित्र माना जाता है और केवल वार्षिक मंदिर उत्सव के दौरान ही भक्तों के दर्शन के लिए बाहर निकाला जाता है। इन मूर्तियों को बनाने में भारी मात्रा में सोने का उपयोग हुआ है।
एक श्रद्धालु ए. जी. प्रसाद कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि हाल ही में हुए मरम्मत कार्य के दौरान इन ऐतिहासिक प्रतिमाओं की मूल सोने की परत को कथित तौर पर हटा दिया गया और उसकी जगह तांबे या किसी कम मूल्यवान धातु का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, सहायक देवस्वम आयुक्त और मंदिर प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) के मुख्य सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी को रिकॉर्ड्स और प्रतिमाओं की गहन जांच कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
क्या जांच रिपोर्ट के बाद आएगा नया राजनीतिक और कानूनी मोड़?
केरल में मंदिरों की संपत्तियों और सोने के प्रबंधन का मुद्दा हमेशा से बेहद संवेदनशील रहा है। सबरीमाला मामले में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट अगले सप्ताह कोर्ट में जमा होने के बाद आरोपियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है। वहीं, एट्टुमानूर मंदिर मामले की स्वतंत्र जांच रिपोर्ट भी राज्य के देवस्वम बोर्ड के प्रशासनिक तौर-तरीकों और पारदिर्शता पर बड़े सवाल खड़े कर सकती है।
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