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अमेरिकी टैरिफ संकट के बीच एस. जयशंकर का वाशिंगटन दौरा: भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में नई उम्मीद

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अमेरिकी विदेश मंत्री से मुलाकात करते विदेश मंत्री एस. जयशंकर, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और टैरिफ संकट पर चर्चा

नई दिल्ली. ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50% टैरिफ और रूस से तेल खरीद पर 25% अतिरिक्त दंड लगाए जाने के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में गंभीर तनाव की स्थिति बनी हुई है। इसी भू-राजनीतिक और आर्थिक दबाव के बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर अगले सप्ताह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक दौरे पर वाशिंगटन रवाना होने वाले हैं।

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताएँ लगभग ठप हैं और वैश्विक स्तर पर अमेरिकी टैरिफ नीति को लेकर कई देश असंतोष जता रहे हैं। विशेषज्ञ इसे भारत की बहुपक्षीय कूटनीति और रणनीतिक संतुलन नीति का अहम चरण मान रहे हैं।

🔹 Critical Minerals Meet: रणनीतिक सहयोग का नया आधार

फरवरी की शुरुआत में वाशिंगटन में होने वाले Critical Minerals Conference में जयशंकर की भागीदारी प्रस्तावित है। इस दौरान उनकी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात होगी, जिसमें:

  • द्विपक्षीय व्यापार
  • रक्षा सहयोग
  • रणनीतिक खनिज संसाधन
  • सप्लाई चेन सिक्योरिटी
  • टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप

जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। यह सम्मेलन भविष्य की इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री, सेमीकंडक्टर सेक्टर और ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

🔹 भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की कोशिश

भारत और अमेरिका वर्तमान में एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं, जिसका प्रमुख उद्देश्य है:

  • अमेरिकी टैरिफ को 50% से घटाकर 15–16% के स्तर तक लाना
  • भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक राहत देना
  • निवेश और मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देना

यदि यह समझौता सफल होता है तो इसका सीधा लाभ भारतीय MSME सेक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री को मिल सकता है।

🔹 भारत-EU FTA: वैश्विक व्यापार रणनीति का नया संकेत

भारत द्वारा यूरोपीय संघ (EU) के साथ हाल ही में किया गया ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारत की वैश्विक व्यापार नीति में बड़ा बदलाव दर्शाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता:

  • ट्रंप की टैरिफ वॉर नीति के जवाब में एक रणनीतिक कदम है
  • भारत की व्यापार विविधीकरण नीति को मजबूत करता है
  • अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की दीर्घकालिक सोच को दर्शाता है
  • भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अधिक सशक्त बनाता है

🔹 अमेरिकी संसदीय प्रतिनिधिमंडल से उच्चस्तरीय संवाद

वाशिंगटन यात्रा से पहले जयशंकर ने दिल्ली में एक उच्चस्तरीय अमेरिकी संसदीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी, जिसमें:

  • सुरक्षा सहयोग
  • व्यापारिक साझेदारी
  • हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक तालमेल

पर सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा हुई थी। यह बैठक भविष्य की कूटनीतिक दिशा का संकेतक मानी जा रही है।

🔹 व्यापार वार्ता को मिल सकती है नई गति

अमेरिकी कूटनीतिक संकेतों के अनुसार जयशंकर की यह यात्रा:

  • रुकी हुई व्यापार वार्ताओं को पुनर्जीवित कर सकती है
  • टैरिफ विवाद के समाधान की दिशा में रास्ता खोल सकती है
  • भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम दे सकती है

📌 निष्कर्ष

एस. जयशंकर का यह वाशिंगटन दौरा केवल एक औपचारिक राजनयिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह भारत की:

✔️ वैश्विक आर्थिक कूटनीति
✔️ टैरिफ दबाव से निपटने की रणनीति
✔️ बहुपक्षीय साझेदारियों की नीति
✔️ व्यापार विविधीकरण मॉडल
का स्पष्ट संकेत देता है।

आने वाले समय में यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा, व्यापार समझौते की संभावनाओं और वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका को नई परिभाषा दे सकता है।

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