कोलकाता। मंगलवार, 28 अप्रैल 2026
भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने (Border Fencing) के मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के प्रति अत्यंत सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने “राष्ट्रीय महत्व” के इस मुद्दे पर राज्य सरकार द्वारा दिखाई गई ढिलाई को “चौंकाने वाला” बताया है।
127 किमी में से केवल 8 किमी जमीन दी गई
न्यायालय ने उल्लेख किया कि पिछली सुनवाई (27 जनवरी, 2026) में स्पष्ट आदेश दिया गया था कि राज्य सरकार 31 मार्च तक वह 127.327 किलोमीटर जमीन सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंप दे, जिसके लिए अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और केंद्र से मुआवजा भी प्राप्त किया जा चुका है।
हालांकि, 22 अप्रैल की सुनवाई के दौरान जो रिपोर्ट पेश की गई, उससे पता चला कि राज्य ने अब तक केवल 8 किलोमीटर जमीन ही बीएसएफ को सौंपी है। मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।
कोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ और जुर्माना
अदालत ने राज्य सरकार की रिपोर्ट को “अस्पष्ट और टालमटोल वाली” (Evasive) करार दिया। कोर्ट की मुख्य बातें निम्नलिखित रहीं:
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अधिकारी पर जुर्माना: आदेश का अनुपालन न करने और आधी-अधूरी रिपोर्ट पेश करने के कारण कोर्ट ने संबंधित संयुक्त निदेशक (L&LR) पर 25,000 रुपये का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है, जिसे उन्हें अपनी जेब से भरना होगा।
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राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता नहीं: कोर्ट ने कहा कि सीमा पर बाड़ लगाना आतंकवाद, घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए अनिवार्य है। इसमें प्रशासनिक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
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विस्तृत हलफनामे की मांग: कोर्ट ने अब राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें जिला-वार और दिन-प्रतिदिन (Day-to-day) की गई कार्रवाई का विवरण देना होगा।
पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
यह मामला पूर्व डिप्टी आर्मी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रत साहा (रिटायर्ड) द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) से संबंधित है। याचिका में तर्क दिया गया है कि पश्चिम बंगाल सरकार की निष्क्रियता देश की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रही है।
| विवरण | आंकड़े/स्थिति |
| कुल अपेक्षित भूमि (श्रेणी-1) | 127.327 किमी |
| अब तक सौंपी गई भूमि | ~8 किमी |
| अगली सुनवाई की तिथि | 13 मई, 2026 |
| प्रभावित जिले | 24 परगना (उत्तर), नदिया, मुर्शिदाबाद, मालदा, दक्षिण दिनाजपुर, उत्तर दिनाजपुर, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और कूचबिहार |
नोट: राज्य सरकार ने पहले ‘चुनावी रोल संशोधन’ को देरी का कारण बताया था, जिसे कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के कार्यों में यह कोई वैध बाधा नहीं है। अब सरकार को यह साबित करना होगा कि शेष 119 किमी जमीन सौंपने में वास्तविक अड़चनें क्या हैं।
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