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नासिक धर्मांतरण मामला: आरोपी निदा खान के ठिकानों पर चलेगा बुलडोजर, प्रशासन ने थमाया नोटिस

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई । रविवार, 10 मई 2026

महाराष्ट्र के नासिक स्थित एक नामी आईटी कंपनी (TCS) में हुए कथित धर्मांतरण और यौन शोषण मामले की मुख्य आरोपी निदा खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा घटनाक्रम में, छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम (CSMC) ने उस आवास को अवैध घोषित कर दिया है जहाँ निदा खान गिरफ्तारी से पहले छिपी हुई थी। प्रशासन ने मकान पर नोटिस चस्पा कर स्पष्ट किया है कि यदि 3 दिन के भीतर अवैध हिस्सा नहीं हटाया गया, तो उसे ध्वस्त कर दिया जाएगा।

मतीन पटेल और राजनीतिक कनेक्शन की जांच

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि फरार रहने के दौरान निदा खान को छत्रपति संभाजीनगर के नारेगांव स्थित कौसर कॉलोनी में मतीन पटेल नामक व्यक्ति ने आश्रय दिलाया था। मतीन पटेल, जो कथित तौर पर ओवैसी की पार्टी AIMIM से जुड़े बताए जा रहे हैं, पुलिस की रडार पर हैं। पुलिस ने उन्हें भी इस मामले में सह-आरोपी बनाया है।

मकान मालिक हनीफ खान और सैयद सरवर का कहना है कि उन्हें निदा की गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी, हालांकि प्रशासन अब उनके दस्तावेजों की भी गहनता से जांच कर रहा है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 25 मार्च 2026 को तब सुर्खियों में आया जब नासिक की एक आईटी कंपनी में कार्यरत हिंदू युवतियों ने धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने और यौन प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए।

  • आरोप: मुख्य आरोपी निदा खान पर आरोप है कि उसने युवतियों का ‘ब्रेनवॉश’ किया, उन्हें नमाज पढ़ने, बुर्का पहनने और धार्मिक साहित्य पढ़ने के लिए मजबूर किया।

  • गिरफ्तारी: निदा पिछले 20-25 दिनों से फरार थी। नासिक पुलिस की 20 जवानों की टीम ने सादे कपड़ों में घेराबंदी कर उसे छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार किया।

  • कोर्ट अपडेट: निदा खान वर्तमान में 11 मई तक पुलिस हिरासत में है। कोर्ट में यह भी जानकारी दी गई कि वह गर्भवती है, जिसके आधार पर उसे कुछ मानवीय राहतें दी गई हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई 

नगर निगम की इस कार्रवाई को केवल एक ‘अवैध निर्माण’ का मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे अपराधियों को संरक्षण देने वालों के खिलाफ एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। मतीन पटेल के कार्यालय और अन्य संपत्तियों की भी जांच की जा रही है कि क्या वे भी नियमों का उल्लंघन कर बनाई गई हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।