नई दिल्ली | सोमवार, 30 मार्च 2026
देश में एक दशक से अधिक समय के इंतजार के बाद 16वीं जनगणना की औपचारिक शुरुआत होने जा रही है। भारत सरकार के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त (RGCCI) ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ‘जनगणना-2027’ के विस्तृत रोडमैप का खुलासा किया। इस बार की जनगणना न केवल डिजिटल होगी, बल्कि यह आधुनिक समाज के बदलते स्वरूप को भी आधिकारिक दस्तावेजों में जगह देगी।
1. लिव-इन रिलेशनशिप पर ऐतिहासिक फैसला
सरकार द्वारा जारी नए FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) के अनुसार, यदि कोई जोड़ा लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा है और वे अपने रिश्ते को ‘स्थायी या स्थिर’ मानते हैं, तो उन्हें जनगणना के दौरान ‘शादीशुदा’ (Married) की श्रेणी में गिना जा सकता है। यह कदम सामाजिक वास्तविकताओं को स्वीकार करने और डेटा सटीकता (विशेषकर हाउसिंग और डिपेंडेंसी रेशियो) सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
2. 1 अप्रैल से ‘हाउस लिस्टिंग’ का आगाज
जनगणना का पहला चरण, जिसे ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ कहा जाता है, 1 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 30 सितंबर 2026 तक चलेगा।
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33 सवाल: प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाकर मकान की बनावट, पीने के पानी, बिजली, शौचालय और संपत्ति से जुड़े कुल 33 सवाल पूछेंगे।
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सेल्फ-एन्यूमरेशन: नागरिक अब खुद भी ऑनलाइन पोर्टल (se.census.gov.in) पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए 15 दिनों का ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ विंडो दिया जाएगा।
3. ‘डिजी डॉट’ (Digi-Dot) और जियो-टैगिंग
तकनीकी रूप से इस बार ‘डिजी डॉट’ तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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इसके तहत हर घर को एक यूनिक डिजिटल आईडी मिलेगी और उसे मैप पर जियो-टैग किया जाएगा।
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इसका सबसे बड़ा फायदा आपदा के समय सटीक राहत कार्य और भविष्य में परिसीमन (Delimitation) प्रक्रियाओं में मिलेगा।
4. आजादी के बाद पहली बार डिजिटल जाति गणना
इस जनगणना की सबसे बड़ी राजनीतिक और सामाजिक विशेषता जाति आधारित डेटा का संग्रह है। 1931 के बाद यह पहली बार होगा जब डिजिटल माध्यम से हर नागरिक की जाति का डेटा जुटाया जाएगा। हालांकि, जाति से जुड़े सवाल मुख्य रूप से दूसरे चरण (फरवरी 2027) में पूछे जाएंगे।
5. जनगणना-2027: महत्वपूर्ण तिथियां और आंकड़े
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
| पहला चरण (HLO) | 1 अप्रैल 2026 – 30 सितंबर 2026 |
| दूसरा चरण (PE) | फरवरी 2027 (जनसंख्या गणना) |
| रेफरेंस डेट | 1 मार्च 2027 (इसी तारीख को आधार मानकर आंकड़े तय होंगे) |
| बजट | लगभग 12,000 करोड़ रुपये |
| कार्यबल | 30 लाख से अधिक डिजिटल प्रगणक (Enumerators) |
क्यों खास है यह डिजिटल अवतार?
इस बार की जनगणना पूरी तरह पेपरलेस होगी। प्रगणक Android और iOS आधारित मोबाइल ऐप का उपयोग करेंगे, जिससे डेटा सीधे सेंट्रल सर्वर पर अपलोड होगा। इससे आंकड़ों के विश्लेषण में लगने वाला समय कम हो जाएगा और देश की नई सामाजिक-आर्थिक तस्वीर पहले के मुकाबले कहीं जल्दी सामने आएगी।
विशेष नोट: जनगणना अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाएगा और डेटा को पूरी तरह एन्क्रिप्टेड रखा जाएगा।
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