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पहचान छिपाकर शोषण का आरोप: सूरत में महिला वकील ने साथी वकील पर दर्ज कराया गंभीर मुकदमा

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कानूनी न्याय और गुजरात पुलिस जांच के प्रतीक के रूप में न्याय का तराजू और कानून की किताबें

सूरत | सोमवार, 18 मई 2026

गुजरात के आर्थिक और व्यावसायिक केंद्र सूरत से एक ऐसा कानूनी और सामाजिक मामला सामने आया है जिसने पेशेवर गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सूरत जिला अदालत परिसर से जुड़े एक मामले में, एक हिंदू महिला वकील ने अपने ही पूर्व सहयोगी और वकील रहीम रजाक (उर्फ रहीम शेख) के खिलाफ पहचान छिपाकर शोषण करने, धोखाधड़ी करने और जातिसूचक उत्पीड़न करने का एक बेहद गंभीर मुकदमा दर्ज कराया है।

परिचय और मामले की पृष्ठभूमि (2018 से शुरुआत)

शिकायत के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत वर्ष 2018 के आसपास हुई थी। दोनों की मुलाकात पेशेवर तौर पर कोर्ट परिसर और वकालत के काम के दौरान हुई थी। धीरे-धीरे यह व्यावसायिक संबंध एक निजी और करीबी रिश्ते में बदल गया। दोनों ने मिलकर एक लीगल पार्टनरशिप भी शुरू की और लंबे समय तक एक ही कार्यालय से अपनी वकालत की प्रैक्टिस को आगे बढ़ाया।

पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने शुरुआत से ही अपनी असली पहचान को गुप्त रखा। उसने खुद का नाम ‘रोहन’ बताया और खुद को हिंदू समाज का हिस्सा प्रदर्शित किया। पीड़िता का विश्वास जीतने के लिए आरोपी ने हिंदू धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे पीड़िता को कभी उसकी वास्तविक पहचान पर संदेह नहीं हुआ।

धार्मिक गतिविधियों में भागीदारी और विश्वासघात का आरोप

प्राथमिकी (FIR) के विवरण के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता को पूरी तरह आश्वस्त करने के लिए उसके साथ गणपति पूजा, सत्यनारायण कथा और अन्य पारिवारिक धार्मिक अनुष्ठानों में नियमित रूप से शिरकत की। आरोपों में यह भी कहा गया है कि उसने कथित तौर पर मांग में सिंदूर भरने और मंगलसूत्र पहनाने जैसी रस्मों के जरिए विवाह का अटूट भरोसा दिलाया और इसी विश्वास की आड़ में लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाए।

मामले में मोड़ तब आया जब पीड़िता ने इस रिश्ते को औपचारिक विवाह (कानूनी विवाह) में बदलने का आग्रह किया। आरोप है कि शादी की बात आते ही आरोपी लगातार टालमटोल करने लगा और पीछे हटने लगा। इसी बीच पीड़िता को तकनीकी और निजी स्रोतों से पता चला कि आरोपी न केवल पहले से शादीशुदा है, बल्कि उसका असली नाम रहीम रजाक है।

विरोध करने पर मारपीट और SC/ST एक्ट के तहत मामला

महिला वकील का कहना है कि जब उसने इस भयानक धोखे और पहचान की सच्चाई का सामना किया और विरोध जताया, तो आरोपी ने उसके साथ न केवल मारपीट की बल्कि उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि को लेकर गंभीर जातिसूचक टिप्पणियाँ और मानसिक उत्पीड़न भी किया।

चूंकि पीड़िता अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से संबंध रखती है, इसलिए पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे सामान्य धोखाधड़ी से अलग माना है। सूरत पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और आरोपी के खिलाफ निम्नलिखित कानूनी धाराओं के तहत मामला पंजीकृत किया है:

  • पहचान छिपाकर यौन शोषण और दुष्कर्म: नए कानूनी प्रावधानों (भारतीय न्याय संहिता) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी पहचान छिपाकर या शादी का झूठा झांसा देकर सहमति प्राप्त करता है, तो उसे अवैध माना जाता है।

  • धोखाधड़ी (Cheating by Impersonation): किसी अन्य व्यक्ति या वर्ग के रूप में खुद को पेश कर आर्थिक और मानसिक लाभ उठाना।

  • SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम: जातिगत भेदभाव, उत्पीड़न और सार्वजनिक/निजी तौर पर अपमानित करने के संदर्भ में सख्त गैर-जमानती धाराएं।


कानूनी पहलू

इस तरह के मामलों को अक्सर सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में ‘लव जिहाद’ जैसे पारंपरिक और अनौपचारिक शब्दों से संबोधित किया जाता है, लेकिन देश की न्यायिक प्रणाली और पुलिस अनुसंधान में इसे “Identity Fraud for Sexual Exploitation” (यौन शोषण के लिए पहचान की धोखाधड़ी) के रूप में विश्लेषित किया जाता है।

कानूनी विश्लेषण: भारतीय न्याय संहिता (BNS) के लागू होने के बाद, पहचान छिपाकर या शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने को अब एक स्पष्ट और कड़े अपराध के रूप में संहिताबद्ध किया गया है। कानूनन, ऐसी परिस्थितियों में दी गई सहमति (Consent) को पूरी तरह से प्रभावहीन माना जाता है क्योंकि वह “तथ्यों के भ्रम” (Misconception of Fact) के तहत ली गई होती है।

सूरत पुलिस वर्तमान में इस मामले में दस्तावेजी सबूत, डिजिटल फुटप्रिंट्स (सोशल मीडिया चैट, कार्यालय के दस्तावेज) और गवाहों के बयानों को खंगाल रही है ताकि अदालत के समक्ष एक मजबूत चार्जशीट पेश की जा सके।

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