भोपाल। सोमवार, 1 जून 2026
उत्तराखंड, गुजरात और हाल ही में 27 मई 2026 को असम द्वारा समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किए जाने के बाद अब मध्य प्रदेश भी इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा कि राज्य में जल्द ही समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू की जाएगी। इसके लिए सरकार ने जनता, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों से सुझाव लेने के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल भी लॉन्च कर दिया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमारे राज्य में चाहे बहनों के तलाक के मामले हों, चाहे पारिवारिक परंपराएं हों या भिन्न-भिन्न धार्मिक विषय हों—आज वैधानिक और सामाजिक रूप से इनमें भिन्नता की आवश्यकता नहीं है। वर्तमान समय की मांग है कि हम सब मिलकर एक समान कानून यानी यूसीसी की ओर बढ़ें।”
सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में बनी समिति
इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने यूसीसी के अध्ययन और इसके क्रियान्वयन की संभावनाओं को तलाशने के लिए एक 6-सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति का नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।
यह समिति वर्तमान में मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर रही है और सभी धर्मों के गुरुओं, विद्वानों तथा आम नागरिकों से सीधे संवाद कर उनके विचार संकलित कर रही है। समिति मुख्य रूप से शादी, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार और गुजारा भत्ता जैसे संवेदनशील विषयों से जुड़े पर्सनल लॉ का बारीकी से अध्ययन कर रही है।
15 जून तक जनता दे सकती है अपने सुझाव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनता से इस ऐतिहासिक बदलाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। सरकार द्वारा लॉन्च किए गए आधिकारिक पोर्टल ucc.mp.gov.in पर जाकर कोई भी नागरिक अपनी राय या आपत्ति दर्ज करा सकता है।
महत्वपूर्ण तिथि: सरकार द्वारा इस पोर्टल पर जनता के फीडबैक और सुझाव साझा करने की अंतिम तिथि 15 जून 2026 तय की गई है। समिति इन सभी सुझावों का संकलन करने के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट और विधेयक का ड्राफ्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।
देश का पांचवा राज्य बनने की राह पर मध्य प्रदेश
भारत में समान नागरिक संहिता को लेकर पिछले कुछ वर्षों में भाजपा शासित राज्यों में काफी तेजी देखी गई है।
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उत्तराखंड: फरवरी 2024 में यूसीसी विधेयक पास करने वाला देश का पहला राज्य बना था।
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गुजरात: मार्च 2026 में मैराथन बहस के बाद विधानसभा में ध्वनि मत से इसे मंजूरी दी।
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असम: हाल ही में 27 मई 2026 को असम ने बहुविवाह पर रोक और लिव-इन पार्टनरशिप के अनिवार्य पंजीकरण जैसे कड़े प्रावधानों के साथ यूसीसी बिल पास किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, मध्य प्रदेश की सामाजिक और भौगोलिक स्थिति यूसीसी के लिए पूरी तरह अनुकूल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे जन-कल्याणकारी कार्यों की कड़ी में यह राज्य सरकार का एक बड़ा और कड़ा सामाजिक सुधार का फैसला माना जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद आगामी मानसून सत्र में सरकार इस विधेयक को सदन के पटल पर रख सकती है।
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