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जम्मू-कश्मीर: राजौरी में पल्स पोलियो पैम्फलेट पर छपा ‘पोलियो फ्री पाकिस्तान’ का नारा, CMO ने BMO को थमाया नोटिस; जांच शुरू

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राजौरी पल्स पोलियो अभियान 2026 का प्रतीकात्मक चित्र

राजौरी । मंगलवार, 30 जून 2026

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के राजौरी जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है। जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चलाए जा रहे गहन पल्स पोलियो टीकाकरण (IPPI) कार्यक्रम 2026 से जुड़े एक सरकारी विज्ञापन (पैम्फलेट) पर ‘पोलियो फ्री पाकिस्तान’ का नारा और वहां के स्वास्थ्य संगठन का लोगो छपा हुआ पाया गया है। सोशल मीडिया पर यह पैम्फलेट वायरल होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

राजौरी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने इस मामले को देश की सुरक्षा और प्रशासनिक साख से जुड़ा बेहद गंभीर मुद्दा मानते हुए कंडी ब्लॉक के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) को तत्काल प्रभाव से ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी कर दिया है। बीएमओ से 24 घंटे के भीतर इस घोर लापरवाही पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

क्या है पूरा मामला और विवाद की वजह?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के निर्देशानुसार 28 जून से 30 जून 2026 तक पूरे भारत में पल्स पोलियो अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए राजौरी जिले के कंडी ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर के कार्यालय की ओर से कथित तौर पर एक विज्ञापन पैम्फलेट तैयार किया गया।

यह विज्ञापन जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और व्हाट्सएप (WhatsApp) ग्रुप्स पर साझा किया गया, तो स्थानीय लोगों और प्रबुद्ध नागरिकों की नजर इस पर पड़ी। विज्ञापन की सामग्री की जांच करने पर पता चला कि इस पर पाकिस्तान के नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (NEOC) का आधिकारिक लोगो लगा हुआ था और साथ ही बड़े अक्षरों में “पोलियो फ्री पाकिस्तान” (Polio Free Pakistan) का नारा लिखा हुआ था।

सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इस पैम्फलेट पर नीचे कंडी ब्लॉक के जांच के दायरे में आए बीएमओ (BMO) का नाम और आधिकारिक पद भी साफ तौर पर अंकित था, जिससे आम जनता के बीच यह संदेश गया कि इसे विभाग द्वारा आधिकारिक रूप से ही स्वीकृत किया गया है।

सीएमओ (CMO) ने नोटिस में क्या कहा?

राजौरी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अपने आधिकारिक आदेश में स्पष्ट किया कि पैम्फलेट पर छपे पाकिस्तानी लोगो और नारे का जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग या केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के किसी भी कार्यक्रम, नीति या संचार से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।

“यह सामग्री पहली नजर में पूरी तरह से गैर-कानूनी, भ्रामक और देश के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के संबंध में आम जनता के बीच भारी भ्रम पैदा करने वाली है। इससे न केवल विभाग की साख धूमिल हुई है, बल्कि सरकारी व्यवस्था पर जनता के भरोसे को भी ठेस पहुंच सकती है।”

— सीएमओ राजौरी, आधिकारिक आदेश

बीएमओ और सीएचओ से मांगे गए इन तीखे सवालों के जवाब:

  1. क्या इस विज्ञापन सामग्री को आधिकारिक अनुमति या उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाकर तैयार, प्रिंट और पब्लिश किया गया था?

  2. इस पैम्फलेट को डिजाइन करने, मंजूरी देने, छापने और विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों में बांटने के लिए कौन से अधिकारी या बाहरी एजेंसियां जिम्मेदार हैं? उनकी पहचान तुरंत उजागर की जाए।

  3. किसके अधिकार या निर्देश से इस पैम्फलेट में विदेशी संगठन का लोगो और भारत विरोधी/भ्रामक कंटेंट शामिल किया गया?

  4. कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) अयूब लोन, जिन्होंने इस पैम्फलेट को सबसे पहले सोशल मीडिया पर प्रसारित किया, उन्होंने इसे आगे शेयर करने से पहले इसकी सत्यता की जांच क्यों नहीं की?

प्रशासनिक लापरवाही या सिर्फ इंटरनेट से ‘कॉपी-पेस्ट’ का नतीजा?

स्थानीय सूत्रों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला जानबूझकर की गई शरारत से ज्यादा डिजिटल युग की एक बड़ी और अज्ञानी लापरवाही (Copy-Paste Culture) का नतीजा हो सकता है। संभावना जताई जा रही है कि पैम्फलेट डिजाइन करने वाले किसी कंप्यूटर ऑपरेटर या एजेंसी ने इंटरनेट (गूगल) से सीधे पल्स पोलियो का कोई रेडीमेड फॉर्मेट या पोस्टर बैकग्राउंड उठा लिया होगा। बिना यह देखे कि उस पर पाकिस्तान का लोगो और नारा दर्ज है, स्थानीय अधिकारियों ने भी बिना वेरिफिकेशन (सत्यापन) के अपने नाम और पद के साथ इसे हरी झंडी दे दी।

हालांकि, चूंकि मामला संवेदनशील सीमावर्ती जिले राजौरी का है, इसलिए सुरक्षा और सतर्कता के लिहाज से प्रशासन कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।

भविष्य के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी

इस बड़ी बदनामी के बाद राजौरी मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने सख्त प्रशासनिक निर्देश जारी कर दिए हैं। अब जिले के किसी भी स्वास्थ्य विभाग, ब्लॉक कार्यालय या अस्पताल के नाम पर कोई भी सामग्री, विज्ञापन, इनफॉर्मेशन एजुकेशन एंड कम्यूनिकेशन (IEC) पोस्टर, पैम्फलेट या सोशल मीडिया पोस्ट बिना उच्च अधिकारियों के लिखित सत्यापन और पूर्व मंजूरी के जारी नहीं की जा सकेगी। यदि भविष्य में ऐसा दोबारा पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सीधे अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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