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विद्रोहियों ने बलूचिस्तान में पुलिस स्टेशन पर किया हमला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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इस्लामाबाद. पाकिस्तान के अशांत दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत में विद्रोहियों द्वारा पुलिस स्टेशन पर हमले की घटना सामने आई है। बलूचिस्तान पुलिस ने इस घटना के बारे में जानकारी दी है। पुलिस ने बताया कि पुलिस स्टेशन पर किए गए इस हमले में बुधवार को एक पुलिसकर्मी सहित कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई और दो अन्य लोग घायल हो गए।

पुलिस ने बताया कि यह हमला बलूचिस्तान के तुरबत इलाके में नसीराबाद पुलिस स्टेशन पर हुआ। उन्होंने बताया कि लगभग 20 विद्रोहियों ने सुबह-सुबह अचानक ये हमला कर दिया। जिला पुलिस अधिकारी मुहम्मद बलूच ने इस हमले की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि कांस्टेबल एस्सा और हसन ने पहले हमलावरों को घेरने की कोशिश की, लेकिन एस्सा को उन लोगों ने मार दिया। वहीं, हसन को अपने कब्जे में कर लिया। इतना ही नहीं, हमलावर ने दोनों पुलिसकर्मियों के हथियार भी अपने कब्जे में ले लिये।

हमले में चार मजदूरों की भी मौत
मुहम्मद बलूच ने बताया कि हमले में मारे गए अन्य लोगों में चार मजदूर थे जो विद्रोहियों के हमले के डर से पुलिस स्टेशन में रात बिताने आए थे। दरअसल, बंदूकधारियों ने 14 अक्टूबर  को तुरबत के सैटेलाइट टाउन में एक हमले में छह श्रमिकों की हत्या कर दी थी। जिसके बाद, स्थानीय अधिकारियों ने प्रांत के बाहर से आने वाले कार्यकर्ताओं को सुरक्षा स्थिति में सुधार होने तक रात के दौरान पुलिस स्टेशनों पर रहने के लिए कहा था।

किसी ने नहीं ली हमले की जिम्मेदारी
बता दें कि अब तक किसी भी समूह ने पुलिस स्टेशन पर हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। इस हमले में मारे गए लोगों के प्रति बलूचिस्तान के कार्यवाहक मुख्यमंत्री अली मर्दन खान डोमकी ने खेद जताया है। उन्होंने इसे निंदनीय और असहनीय बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया का कोई भी धर्म आतंकवाद की इजाजत नहीं देता। मजदूरों की हत्या एक दुखद घटना है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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लंबे समय से अशांत है बलूचिस्तान
बता दें कि ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से लगा पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत लंबे समय से अशांत है। वहां समय-समय पर ऐसे हिंसक हमलों की खबरें आती रहती हैं। बलूच विद्रोही समूहों ने पहले भी क्षेत्र में 60 अरब अमेरिकी डॉलर की चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा परियोजनाओं को निशाना बनाते हुए कई हमले किए हैं। बलूच चरमपंथियों का आरोप है कि बाहरी लोग, खासकर पंजाब से आने वाले लोग वहां आकर स्थानीय नौकरियां और संसाधनों पर कब्जा कर लेते हैं और उन्हें निशाना बनाते हैं।

साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।