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धर्मांतरण के आरोप में शुआट्स के निदेशक विनोद बी लाल के खिलाफ चार्जशीट दायर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. नैनी स्थित सैम हिगिन्नबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेस (शुआट्स) के निदेशक प्रशासन विनोद बी लाल के खिलाफ धर्म परिवर्तन मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। घूरपुर थाने में दर्ज इस मामले की विवेचना के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उस पर लगाए गए आरोप सही माने हैं। इसके अलावा जेल भेजे गए दो अन्य आरोपियों के खिलाफ भी चार्जशीट लगा दी गई है। इस मामले में शुआट्स कुलपति आरबी लाल भी आरोपी हैं, लेकिन उन्हें सु्प्रीम कोर्ट से राहत मिली हुई है। वहीं, विनोद बी लाल, धर्मगुरु राजकरन व मो.रिजवान जेल भेजे जा चुके हैं। विनोद बी लाल के ही स्कूल की पूर्व महिला कर्मचारी ने चार सितंबर को घूरपुर थाने में यह एफआईआर दर्ज कराई थी। उसने जबरन धर्म परिवर्तन कराने व नाबालिग बेटियों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया था।

सूत्रों का कहना है कि विवेचना के दौरान विनोद बी लाल व धर्मगुरु राजकरन पर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप सही मिला। उधर, एक अन्य नामजद आरोपी विनोद बी लाल के स्कूल के सुपरवाइजर मो.रिजवान निवासी हथिगन पुरवा खास थाना घूरपुर पर महिला की नाबालिग बेटियों से छेड़छाड़ के आरोप सही पाए गए हैं। इसी आधार पर तीनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। लखनऊ से हुई थी गिरफ्तारी विनोद बी लाल को लखनऊ के मोहनलालगंज से एक अक्तूबर को गिरफ्तार किया गया था। उसकी गिरफ्तारी नैनी में दर्ज हत्या के प्रयास के मामले में हुई थी। इसके बाद घूरपुर में दर्ज धर्म परिवर्तन मामले में भी उसका रिमांड बनवाया गया था। मूलरूप से मिर्जापुर निवासी महिला ने धर्मांतरण व पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में वीसी समेत चार पर नामजद मुकदमा दर्ज कराया है। तीन अज्ञात आरोपी भी बनाए गए हैं।

यह है आरोप
महिला का आरोप है कि नौकरी का लालच देकर उसका धर्म परिवर्तन कराया गया। बाद में अन्य लोगों का भी धर्म परिवर्तन कराने का दबाव डाला गया। इन्कार पर नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद विनोद बी लाल के स्कूल के सुपरवाइजर रिजवान ने अपने तीन अज्ञात साथियों संग आकर उसकी नाबालिग बेटियों से अश्लील हरकत की। साथ ही जान से मारने की धमकी दी।

साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।